Thursday, 27 April 2017

मनमर्जी से एंटीबायोटिक्स का सेवन तकलीफ बढ़ा भी सकता हे

आजकल बिना डॉक्टरी परामर्श के एंटीबायोटिक्स लेने का चलन आम हो गया हे। एंटीबायोटिक्स ऐसी दवा हे जो संक्रमण और कई  बीमारियों के इलाज के लिए दी जाती हे। ये बेक्टीरिया के कारण होने वाली बीमारियों का इलाज करती हे तथा अन्य वायरल फ्लू आदि में काम नही करती। कोई भी बेक्टीरियल इन्फेक्शन होने पर हमे डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना चाहिए और सलाहनुसार नियमित पूरा कोर्स करना चाहिए। छोटी मोटी तकलीफों में मनमर्जी से एंटीबायोटिक्स लेना और उसे वक़्त पर पूरा कोर्स नही करने या सही तरीके से पूरी डोज नही लेने के कारण समस्या खत्म होने के बजाये और बढ़ जाती हे। नियमित सलाहनुसार  नही लेने पर सभी बेक्टीरिया नही मरते और कुछ जीवाणु बचे रह जाते हे जो की और अधिक शक्तिशाली हो जाते हे। फिर उनपर साधारण एंटीबायोटिक्स का असर नही होता। इन्हें एंटीबायोटिक्स रेसिस्टेंट बेक्टीरिया कहते हे जो की लम्बी और गम्भीर बीमारी का कारण बन सकते हे। फिर इसके इलाज के लिए ज्यादा हाई पॉवर एंटीबायोटिक्स की जरुरत पडती हे जिसके साइड इफ़ेक्ट भी बहुत हे। जैसे चक्कर आना, उल्टी, एलर्जिक रिएक्शन, साँस लेने में तकलीफ, दिल की धडकन बढना, पेट दर्द आदि।
  लगातार बढती बेक्टीरिया रेसिसटेन्सी, बेअसर होते एंटीबायोटिक्स विश्व भर में चिंता का विषय हे। मरीज को खास अहतियात बरतने की जरूरत हे ताकि इसके गम्भीर परिणामो से बचा जा सके। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन ना करे। नियमित सलाहनुसार कोर्स पूरा करे। दवाइयों की डोज सही मात्रा में और सही समय पर ले।
  इसके अलावा छोटी छोटी तकलीफों में एंटीबायोटिक्स  लेने के बजाये हमे नेचुरल उपायों को अपनाना चाहिए जो प्रभावपूर्ण भी हे और सुरक्षित भी। कुछ प्राकृतिक चीजे जैसे लहसुन, अदरक, हल्दी, प्याज, शहद, एप्पल साइडर विनेगर आदि एंटीबायोटिक्स की तरह कार्य करते हे। दूसरा पोषक भोजन लेना भी जरुरी हे ताकि इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहे और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बनी रहे।

Sunday, 16 April 2017

सुबह का नाश्ता breakfast कितना जरुरी अच्छी सेहत के लिए

दिन की शुरआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा गुजरता हे। पूरी रात आराम करने के बाद जब हम सुबह उठते हे तो हमे भरपूर ऊर्जा की जरूरत होती हे इसलिए सुबह का नाश्ता  पोष्टिक और भरपूर करना चाहिए जिसमे प्रोटीन, कर्बोहाईड्रेड़ और हेल्दी फैट ठीक ठीक मात्रा में हो ताकि हमारा पूरा दिन स्फूर्तिदायक और ऊर्जावान बना रहे।
  एक सर्वे के अनुसार सुबह का नाश्ता ना लेने पर तुनकमिजाजी बढ़ जाती हे। सर्वे में पता चला की जिन्होंने सुबह का  नाश्ता नही किया था उनमे से 53 फीसदी लोगो का मूड पुरे दिन ऑफ रहा और वह पूरा दिन किसी ना किसी के साथ चिक चिक करते रहे। जबकि सुबह भरपूर और अच्छा नाश्ता करने वाले 93 फीसदी लोग दिनभर काफी अच्छे मूड में रहे। इसके अतिरिक्त सुबह का पोष्टिक नाश्ता करने पर रक्त में श्वेत रक्त कणिकाओ में अपेक्षित वृद्दि देखी गयी हे जो  बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती हे।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए भी सुबह का नाश्ता जरुरी हे। और रात को हल्का भोजन करने और सुबह पोष्टिकता से भरपूर नाश्ता करने से रक्त शर्करा और ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती हे।
  आहार विशेषज्ञों के अनुसार लिवर या यकृत सुबह के वक्त अपने ईंधन ग्लाइकोजन से लगभग 75 प्रतिशत वंचित रहता हे। लिवर को ये ईंधन ग्लूकोज से मिलता हे। अपनी क्षतिपूर्ति के लिए लिवर यह ग्लूकोज  मांसपेशियो के प्रोटीन से प्राप्त करना चाहता हे। अत: शरीर में कार्बोहाईड्रेड की कुछ मात्रा पहुचने पर लिवर को ग्लाइकोजन मिल जाता हे और मस्तिष्क को बेहतर कार्य करने के लिए ग्लूकोज की आपूर्ति हो जाती हे।
  सुबह के नाश्ते में क्या खाना चाहिए ये तो अपनी अपनी पसंद पर निर्भर करता हे मगर इतना ध्यान रखना जरुरी हे की नाश्ते में वसा की मात्रा 10 ग्राम से अधिक ना हो और प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेड, वसा और खनिज की संतुलित मात्रा हो।
  नाश्ते में ताजे फल, गेहू की ब्रेड, मलाई रहित दूध, उबले अंडे, अंकुरित अनाज, सोया परांठे, फ्रूट और वेजिटेबल स्मूदीज, आमलेट, ड्राई फ्रूट आदि लिए जा सकते हे या जो भी नाश्ता लिया जाये उसमे वसा, शक्कर और नमक की मात्रा संतुलित होनी चाहिए।


Wednesday, 5 April 2017

दिमागी स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रखने में उपयोगी 10 महत्त्वपूर्ण ब्रेन फ़ूड

दिमागी स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए पोषक भोजन बहुत जरूरी हे। कुछ खाद्य पदार्थो में खास तौर से ऐसे तत्व पाए जाते हे जो दिमाग के लिए अत्यंत लाभकारी हे। इस तरह के खाद्य पदार्थो में 10 फ़ूड ऐसे हे जिन्हें ब्रेन फ़ूड भी कहा जाता हे। ये दिमाग को ताकत देते हे और उसकी कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलने में मदद करते हे। ये 10 ब्रेन फ़ूड इस प्रकार हे।--

1* डार्क चोकलेट ---  डार्क चोकलेट में triptofen,  flevonaid, anti oxident , magnishiam होता हे। triptofen शरीर में फील गुड हार्मोन को रिलीज करने में मदद करता हे जिससे हमे अच्छा महसूस होता हे। फ्लेवोनाइड रक्त संचार बढ़ा कर दिमाग की याद करने की क्षमता और फोकस बढ़ाता हे।
  एंटी ओक्सिडेंट, फ्री रेडिकल्स से बचाकर दिमाग की पॉवर बढ़ाते हे। और मैग्नीशियम स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल को कम करने में मदद करता हे जिससे तनाव कम करने में मदद मिलती हे।

2* बादाम ----  बादाम से प्रोटीन,  विटामिन बी6 और विटामिन ई , जिंक और फेटि एसिड्स मिलते हे। प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओ के पुनर्निर्माण में मदद करता हे। विटामिन्स दिमाग की सम्पूर्ण सेहत को बढ़ाते हे और कोशिकाओ के बूढ़ा होने की गति को धीमा करते हे।
जिंक रक्त प्रवाह में फ्री रेडिकल्स को रोककर  दिमाग की कोशिकाओ को  टूटने से बचाने में मददगार हे।

3* अखरोट ---- अखरोट में पोली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स, विटामिन ई, मिनरल्स और फाइबर होता हे। फैटी एसिड्स दिमाग के लिए बहुत जरुरी होते हे। ये दिमाग की पॉवर और अलर्टनेस बढ़ाते हे।

4* ब्रोकली ----- दिमाग की लर्निंग कैपेसिटी बढ़ाती हे और दिमाग को शांत बनाये रखने में मदद करती हे।

5* पालक -----  पालक में आयरन बहुत होता हे जिससे रक्त प्रवाह बढ़ता हे और दिमाग तेज करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर्स का स्राव होता हे।

6* काले अंगूर ----- काले अंगूर में एंटी ओक्सिडेंट , विटामिन, प्लांट कंपाउंड जैसे फाइटों केमिकल्स पाए जाते हे। ये ब्रेन को डेमेज करने वाले फ्री रेडिकल्स को कंट्रोल करते हे।

7* स्ट्रॉबेरी ------ स्ट्रॉबेरी में  ओक्सिडेटिव स्ट्रेस से दिमाग को सुरक्षित रखने की क्षमता होती हे जिससे अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा कम होता हे।

8* टमाटर ---- टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपिन पॉवर फुल एंटी ओक्सिडेंट और कैंसर रोधी हे। ये फ्री रेडिकल्स का प्रभाव कम करके अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों का खतरा कम करता हे।

9* अनार ----  अनार में भी एंटी ओक्सिडेंट बहुतायत से पाए जाते हे जो फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा देते हे।

10* व्होल ग्रेन ---- साबुत अनाज और उससे बनी चीजे भी दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करते हे।
 

Monday, 3 April 2017

गर्मियों में यू करे त्वचा skin की देखभाल

मौसम बदलने और बढती गर्मी के साथ ही त्वचा की समस्याए भी उपजने लगती हे। जैसे एक्ने, सनबर्न, टैनिंग। इन समस्याओ से बचने के लिए गर्मियों में कुछ सावधानिया और थोड़ी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती हे। प्राकृतिक उपाय भी मददगार साबित होते हे। तो देखते हे की इन गर्मियों में किस तरह स्किन की ख्याल रखे---

*  गर्मियों में ये बहुत जरूरी हे की घर से बाहर निकलने से पहले किसी अच्छे सनस्क्रीन मोइश्चराइजर का प्रयोग करे जो की वाटर बेस्ड हो तो अच्छा हे। ये स्किन में जल्दी अब्सोर्व हो जाता हे। ऑयल और क्रीम बेस्ड मोइश्चराइजर से गर्मियों में बचना चाहिए।

* धुप से बचने के लिए स्कार्फ और सनग्लासेज का प्रयोग करे।

* गर्मियों में स्किन की नियमित क्लींजिंग करते रहना चाहिए। इसके लिए किसी अच्छे क्लीन्ज़र का प्रयोग तो कर ही सकते हे साथ ही प्राकृतिक उपाय भी अपना सकते हे। इसके लिए स्किन को गुलाबजल से साफ़ करे। पपीता भी एक नेचुरल क्लीन्ज़र हे इसे मैश करके कुछ देर चहरे पर लगाये फिर साफ़ पानी से धो ले।

* गुलाबजल में खीरे का रस और नींबू के रस की कुछ बुँदे मिलाकर चहरे पर कुछ देर लगाना भी स्किन के लिए अच्छा हे।

* एलोवेरा सभी तरह की स्किन टाइप के लिए अच्छा होता हे। इसके गूदे को मैश करके 20 मिनट चहरे पर लगाये।

*  मुल्तानी मिट्टी में संतरे के छिलके का पाउडर, शहद, गुलाबजल मिला कर पेस्ट बनाये और चहरे पर लगाये। सूखने पर धो दे। ये पैक तैलीय त्वचा का  अतिरिक्त ऑयल हटाकर स्किन को मोइश्चराइज़ करता हे।

*   केला और शहद मिलाकर लगाने से स्किन में ग्लो आता हे।

*  नींबू और शहद मिलाकर चहरे पर 20 मिनट लगाये। ये गर्मियों के लिए बहुत अच्छा फेस पैक हे।

*  बादाम का पाउडर, कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाये और 30 मिनट चहरे पर लगाये।

      इन सब उपायों के साथ ही स्किन को स्वस्थ रखने के लिए 2 से 3 लीटर पानी पीना, भरपूर नींद लेना और पोषक भोजन लेना भी जरुरी हे।