गेंहू के बीज को जब बोया जाता हे तो कुछ दिनों में अंकुरित होकर बढने लगता हे। और उसमे पत्तिया निकलने लगती हे। ये पत्तियों वाला भाग गेहू का जवारा या wheatgrass कहलाता हे। गेहू का जवारा और उसका निकाला गया रस अत्यंत पोषक होता हे। इसे ग्रीन ब्लड (हरा रक्त) भी कहते हे। ये एक सम्पूर्ण आहार हे और विभिन्न रोगों से लड़ने में बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ हे। इसमें भरपूर क्लोरोफिल, एंजाइम्स, लोह तत्व, बीटा केरोटीन, फोलिक एसिड, विटामिन बी काम्प्लेक्स, विटामिन के और मैग्नीशियम होता हे। इसमें विटामिन बी 17 ( लेट्रियल) भी पाया जाता हे जो बलवान केंसर रोधी हे।
एंटी ऑक्सीडेंट , फ्री रेडिकल्स से बचाकर आयुवृद्दि की गति को धीमा करते हे। और विभिन्न तरह के रोगों से बचाते हे। एंटी ऑक्सीडेंट आयुवर्धक और आरोग्यवर्धक होते हे। ये डीएनए की संरचना में विकृति नही होने देते। रक्तवाहिकाओ और त्वचा को स्वस्थ रखते हे। गेहू के जवारे wheatgrass में कई शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट होते हे।
गेहू के जवारे का एक महत्त्वपूर्ण तत्व हे क्लोरोफिल। क्लोरोफिल निम्न प्रकार से लाभदायक हे....
* ये घावो के लिए कीटाणुनाशक हे, फंगस रोधी हे और शरीर से टॉक्सिंस का विसर्जन करता हे। रोग पैदा करनेवाले जीवाणुओ को नष्ट करता हे। यकृत का शोधन करता हे।
* आर्थराइटिस, आमाशय शोथ, गले की खराश में अत्यंत लाभकारी हे।
*यह रक्त बनाता हे।
गेहू के जवारे wheatgrass के रस के कुछ ओषधीय उपयोग निम्न प्रकार हे-
1. गेहू के जवारे का रस केंसर कोशिकाओ को नष्ट करता हे। सर्वप्रथम तो इसमें भरपूर क्लोरोफिल होता हे जो शरीर को ऑक्सीजन से सराबोर कर देता हे। अधिक मात्रा में ओक्सिजन की उपस्थिति से केंसर कोशिकाए नष्ट होने लगती हे। दूसरा गेहू के जवारे में विटामिन बी 17 ( लेट्रियल) और सेलेनियम दोनों होते हे जो केंसर रोधी हे। ये प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता हे और ये रस हल्का क्षारीय होता हे जबकि केंसर अम्लीय माध्यम में ही फलता फूलता हे।
2. ये शरीर से हानिकारक पदार्थ ( टोक्सीन्स) का विसर्जन करता हे।
3. इसके सेवन से जोड़ो के दर्द, त्वचा सम्बन्धी बीमारियों में लाभ होता हे। यदि कुछ महीने इसका सेवन किया जाये तो मुहांसे और उनके दाग धब्बे, झाइयं सब साफ हो जाते हे। एग्जीमा और सोरायसिस में भी लाभ होता हे।
4. गेहू के जवारे wheatgrass का रस माइग्रेन से मुक्ति में भी लाभदायक हे।
5. इसके सेवन से कब्ज़, गैसीय विकार दूर होते हे। पेट के कृमि को शरीर से बहार निकालने के लिए और मासिक धर्म की अनियमितताए दूर करने के लिए भी उपयोगी हे।
6. नेत्र विकार दूर करके नेत्र ज्योति बढ़ाता हे और रक्तचाप और हृदय रोग में लाभकारी हे।
7.गेहू के जवारे के रस के नियमित सेवन के साथ कच्चे अपक्व भोजन के सेवन से मोटापे में अतिशीघ्र लाभ होता हे।
8.आंतो और आमाशय के अल्सर में पत्तागोभी का रस और गेहू के जवारे का रस चमत्कारिक परिणाम देता हे।
9.शरीर की सुरक्षा प्रणाली मजबूत करता हे।
10. दांतों को सड़ने से बचाता हे और मुह की दुर्गन्ध दूर करता हे।
11. इससे बाल असमय सफ़ेद नही होते और शरीर उर्जावान, स्वस्थ बना रहता हे।
गेहू के जवारे wheatgrass को उगाने की विधि-
* अच्छी किस्म के जैविक गेहू के बीज ले।
* अच्छी उपजाऊ मिटटी में जैविक गोबर की खाद मिला ले।
* सात गमले ले जिनमे नीचे छेद हो। गमले के छेद को पत्थर के टुकड़े से ढककर , खाद मिली हुई मिटटी को आधा भर ले। और पानी छिडक दे।
* एक रात पहले जग में 100 ग्राम गेहू भिगो कर रखे।
* सातों गमले में एक एक करके रविवार, सोमवार इस प्रकार सातों दिन के नाम लिख दे।
*मान लो आज रविवार हे तो एक रात पहले भीगे गेहू को धोकर मिटटी से आधा भरे गमले में एक परत के रूप में बिछा दे। फिर उसके ऊपर थोड़ी मिटटी डाल दे और पानी से सींच दे। गमले ऐसी जगह रखे जहा थोड़ी धुप और हवा हो मगर सीधी धुप गमलो पर ना पड़े। अगले दिन सोमवार वाले गमले में फिर हर रोज एक गमले में गेहू बोते रहे।
* दो बार पानी दे ताकि मिटटी नम बनी रहे। जवारे एक इंच बढने पर एक बार पानी देना ही पर्याप्त हे।
* सात दिन बाद 5 या 6 पत्तियों वाला 6 से 8 इंच लम्बा जवारा निकल आएगा। इसे जड़ सहित उखाड ले और इस गमले में फिर से गेहू बो दे।
*धुले हुए जवारे की जड़ काटकर हटा दे और फिर इसे मिक्सी में थोडा पानी डालकर पीस ले और छानकर उपयोग करे।
सेवन का तरीका-
सामान्यतया 60 से 120 मिली. प्रतिदिन या एक दिन छोडकर खाली पेट सेवन करना चाहिए या फिर 30 से 60 मिली. दिन में दो या तीन बार भी ले सकते हे। सप्ताह में पांच दिन सेवन करना सही होता हे। इसमें नमक, चीनी या कोई अन्य मसाला नही मिलाना चाहिए।
ध्यान दे- सभी जानकारी शिक्षा प्रद हे। किसी भी ओषधीय उपयोग से पहले चिकित्सक या एक्सपर्ट की सलाह जरुर ले।