Wednesday, 29 March 2017

राजस्थान की स्पेशल गट्टा मसाला सब्जी

गट्टे की सब्जी जो की बेसन से बनाई जाती हे और यह पूरे राजस्थान में काफी पसंद की जाती हे। आइये जानते हे गट्टा मसाला सब्जी बनाने की विधि---

सामग्री-- गट्टे के लिए

*  250 gm बेसन

* 3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई

*  1/2  छोटा चम्मच सौफ़

*  1/2 छोटा चम्मच जीरा 

* 1/2  छोटा  चम्मच अजवाइन

* 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला पिसा हुआ
 
*  1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
 
*  1 छोटा चम्मच वेजिटेबल ऑयल (मोयन के लिए)

*  नमक स्वाद के अनुसार
 

ग्रेवी के लिए----

*  1/2 चम्मच जीरा

*  1/2 चम्मच अजवाइन

*  1 मध्यम प्याज़ बारीक कटा हुआ

*  2 टमाटर छोटे आकार में कटे हुए

*  2 छोटे चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट

*  1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

*  1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर

*  नमक स्वाद के अनुसार

*  एक छोटा कप दही

*  एक बड़ा चम्मच वेजिटेबल ऑयल

विधि--- गट्टे बनाने के लिए गट्टे की सारी सामग्री को मिला ले फिर उसमे थोडा थोडा पानी डालकर बेसन के आटे को अच्छी तरह गुंध ले। अब इसके पतले लम्बे आकार के रोल बना ले। एक बर्तन में एक लीटर या अंदाजे से पानी ले और उसे गैस पर उबालने के लिए रख दे। उबाल आते ही इसमें बेसन के रोल एक एक करके डालती जाये। मध्यम आंच पर इसे 10 मिनट पका ले। फिर पानी से निकाल कर अलग बर्तन में 1/2  इंच के टुकडो में काट ले।
   ग्रेवी बनाने के लिए एक कड़ाही में तेल गरम करे। अब उसमे जीरा और अजवाइन डाले, तड़कने पर प्याज डाले और थोडा सॉफ्ट होने तक पकाए। अब लहसुन अदरक का पेस्ट डालकर अच्छी तरह पकाए। फिर उसमे  बारी बारी से टमाटर, लालमिर्च, हल्दी, नमक और दही डालकर इतना पकाए की मसाले से ऑयल अलग होने लगे। अब गट्टे डालकर 2 मिनट पकाए। फिर आधा गिलास पानी डालकर ( उबले गट्टे का पानी भी ले सकते हे) डालकर सिर्फ 2 मिनट पकाए और हरा धनिया से गार्निश करके रोटी या परान्ठे के साथ सर्व करे।

Tuesday, 28 March 2017

फ़ूड पॉइजनिंग Food poisoning से कैसे बचे

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका हे और गर्मियों में खाने में सावधानी रखने की जरुरत सर्दियों के मुकाबले ज्यादा होती हे। ये मौसम unhealthy बैक्टीरिया, फंगस, वायरस जैसे कीटाणुओ के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करवाता हे, तो थोड़ी सी भी असावधानी से food poisoning का खतरा रहता हे। आइये जानते हे food poisoning से बचने के लिए जरूरी उपाय------

*  कच्चे फल और सब्जियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह धो ले।

* वेज और नॉनवेज के लिए अलग अलग चोपिंग बोर्ड रखे।

*  वैसे तो लकड़ी और प्लास्टिक दोनों ही तरह के चोपिंग बोर्ड की सतह पर बैक्टीरिया तकरीबन समान रूप से ही पनपते हे मगर लकड़ी के चोपिंग बोर्ड के जरिये खाना कम दूषित होना पाया गया हे। अत: लकड़ी का बोर्ड ज्यादा बेहतर हे।

* चोपिंग बोर्ड को वक़्त वक़्त पर सिरके से भी साफ़ करते रहना चाहिए और ज्यादा खरोंच पड़ने पर बदल देना चाहिए।

* गर्मी में ताज़ा पका हुआ और हल्का सुपाच्य भोजन ही लेना चाहिए।

*  फ्रिज भी वक्त वक़्त वक़्त पर अच्छी तरह साफ़ करते रहना चाहिए वरना इसमें बैक्टीरिया पनप सकते हे। इसे साफ़ करने के लिए सिरके का प्रयोग कर सकते हे।

*  खाने का सामान एयर टाइट फ़ूड कंटेनर में पैक करके फ्रिज में रखना अच्छा रहता हे।

*  खाना पकाने और पीने के पानी की स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी हे।

*  गर्मियों में बाहर के खाने से यथासंभव बचना चाहिए।

*  व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना जरुरी हे। खाना खाने से पहले बच्चो को भी हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए।

*   गर्मियों में खाने के साथ दही का प्रयोग अच्छा रहता हे। इसके लाभदायक बैक्टीरिया खाना पचाने में मदद करते हे।

इस तरह कुछ साधारण सी सावधानी रखकर हम गर्मियों में काफी हद तक food poisoning के खतरे से बच सकते हे।


Sunday, 26 March 2017

अनचाहे तनाव stress से कैसे बचे, तनाव से बचने के उपाय

आजकल की भागदौड़ वाली ज़िन्दगी में वक़्त बेवक्त का तनाव अनचाही परेशानी लेकर आता हे। अगर इस तनाव stress का ठीक से मैनेजमेंट ना करे तो ये हमारी ज़िन्दगी से छोटी छोटी खुशियों के पल चुराकर बेवजह की उदासी और तकलीफ की वजह बनता हे। तो जब भी किसी वजह से तनाव महसूस हो, तो उसे बढने ना दे। आइये जानते हे कुछ ऐसे टिप्स जो तनाव
stress management में सहायक हे। मै ये नही कहती की इन तरीको से तनाव बिल्कुल खत्म हो जायेगा, मगर इसे कम करने में जरुर मदद मिलेगी---

* दोस्तों और फैमिली से बात करना (Talk to friends and family)-----  हम अक्सर सुनते हे की बात कह देने से मन हल्का हो जाता हे। ये सही भी हे। तनाव की स्थिति में हम अगर हम अपने दोस्तों या किसी फैमिली मेम्बर से बात करते हे या अपनी परेशानी शेयर करते हे तो इससे stress में कमी आती हे और दूसरा फायदा ये भी हे की शेयर करने से कभी कभी हमे अच्छी सलाह के रूप में मसले का हल भी मिल जाता हे।

*   कही बाहर घूम आये (Go to someplace)-----
ये सही हे की तनाव की स्थिति में रूम में अकेले बैठे रहना तनाव को और बढ़ाता हे। ऐसे में रूम से बाहर निकल कर कही घूम आये या बाहर के प्राकृतिक नजारों जैसे हरियाली, पक्षियों का चहकना आदि का आनंद ले, इससे भी राहत मिलती हे।

*  आपकी जो भी हॉबी हो वो करे (Explore your hobbies)------- हर इंसान का कुछ ना कुछ शौक होता हे। शौक का मतलब ही होता हे ऐसा काम जिसको करके ख़ुशी महसूस हो। तो आपका जो भी शौक हो...
कुकिंग, गार्डनिंग, राइटिंग या जो भी, बस उस काम में लग जाइये और देखिये तनाव कैसे कम हो जाता हे।

*  सर्वशक्तिमान से बात करें ( Talk to God )----- जिस भी वजह से तनाव हो रहा हे, वह परेशानी अपने रब के सामने रख दे। अल्लाह, ईश्वर, गॉड से बात करे और यकीन रखे की वह सर्वशक्तिमान हे और आपकी हर परेशानी को हल करने में सक्षम हे। ऐसा कुछ करे जिससे God से जुडाव महसूस हो। कुरान, बाइबिल , गीता भी पढ़ सकते हे, योगाभ्यास भी कर सकते हे। या कुछ और नही तो कम से कम किसी शांत जगह पर बैठ कर चुपचाप सर्वशक्तिमान का ध्यान करे।

* गहरी सांस लेना ( Deep breath)----  प्राणायाम या साधारण शब्दों में गहरी सांस लेने वाले योगासन तनाव दूर करने में दवा जितने कारगार होते हे। दिन में एक बार सिर्फ 10 मिनट के लिए प्राणायाम का अभ्यास तनाव stress management में सहायक हे।

*  जॉगिंग -----  सुबह सूरज निकलने के पहले उठने और कुछ देर जॉगिंग करने या सिर्फ टहलने से भी मूड अच्छा रहता हे। क्योकि इससे दिमाग में 'सेरिटोनिन'  हार्मोन का स्राव बढ़ जाता हे जिससे ख़ुशी, सुकून, राहत की अनुभूति होती हे।

*   पोषक भोजन ले ( Take nutritious food ) -----
   अपने भोजन में unhealthy चीजो को हटाकर healthy चीजे शामिल करे जैसे खाने में नमक, चीनी और वसा कम ले। रेड मीट कम ले और फिश , चिकन और दुसरे सी फ़ूड के साथ ढेर सारी फल सब्जियां शामिल करे। याद रखे कुदरत ने इंसानी शरीर को ऐसा बनाया हे की यदि इसे पूरा पोषण मिलता रहे तो यह तनाव stress क्या, बड़ी बड़ी बीमारियों से भी लड़ने में सक्षम हे।

Friday, 24 March 2017

जल्दी और आसानी से बनने वाली स्वादिष्ट ब्रेड रसमलाई

रसमलाई एक बहुत पापुलर बंगाली मिठाई हे, जो बहुत टेस्टी होती हे। वैसे तो रसमलाई छैना और दूध से बनाई जाती हे मगर आज हम यहा ब्रेड से बनी रसमलाई की रेसिपी शेयर कर रहे हे जो बहुत आसानी से और जल्दी बन जाती हे और स्वादिष्ट भी बहुत होती हे। आइये जानते हे इसे बनाने की विधि-

सामग्री-

* 1 लीटर फुल क्रीम दूध

*एक कप शक्कर

* 8 सफ़ेद ब्रेड स्लाइस

* थोडा सा केसर

* आधा कटोरी बादाम और पिस्ता ( लम्बे और पतले कटे हुए)

* आधा चम्मच पिसी इलाइची

विधि-  सबसे पहले दूध को गैस पर उबालने के लिए रख दे और उबाल आने पर गैस की फ्लेम मीडियम कर दे और तब तक पकाए जब तक की दूध आधा रह जाये। फिर उसमे केसर और कटे पिस्ता और बादाम आधा डाल दे बाकि आधा गर्निशिंग के लिए रख दे। फिर उसमे शक्कर डाल दे और कुछ देर और पकाए। बीच बीच में चम्मच से चलाते रहे। जब दूध आधी क्वांटिटी से ज्यादा गाढ़ा हो जाये तो गैस बंद कर दे। आप चाहे तो एक छोटा चम्मच कस्टर्ड पाउडर इस्तेमाल कर सकते हे। उसके लिए कस्टर्ड पाउडर को पहले 2 चम्मच ठन्डे दूध में मिक्स कर ले फिर उबलते
हुए दूध में धीरे धीरे डालकर 2 मिनट और पका ले। इसमें इलाइची पाउडर डाल दे। फिर इस दूध की मलाई को थोडा ठंडा कर ले।
  ब्रेड को किसी कुकी कटर या कटोरी की सहायता से गोल काट ले। सर्व करने के कुछ देर पहले ब्रेड को बाउल या प्लेट में डाले और ऊपर से मलाई डाले। फिर पिस्ता और बादाम की कतरन से सजाकर , ठंडा करके सर्व करे।
  ब्रेड को गर्म दूध मलाई में ना डाले वरना वह टूट जाएगी। थोडा ठंडा होने के बाद ही डाले। ये बहुत आसानी से बनने वाली और स्वादिष्ट रेसिपी हे।

Thursday, 23 March 2017

जूस पीने से बेहतर हे फल खाना

अच्छे स्वास्थ्य के लिए आजकल हर कोई जूस की वकालत करता हे। जूस पीना मजेदार हो सकता हे मगर इसे फलो के विकल्प के रूप में अपनाना बहुत ज्यादा फायदेमंद नही हे। फलो और सब्जियों में फाइबर होता हे जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा हे। फाइबर कब्ज़ से बचाता हे और हमे उर्जावान बनाये रखता हे। और भी बहुत से फायदे हे फाइबर के। फल और सब्जियों का जूस निकाल कर पीने से ये जरूरी फाइबर बाहर ही रह जाता हे और हमे फल सब्जियों का पूरा लाभ नही मिलता।
  दूसरा ठोस आहार के मुकाबले तरल भोजन जल्दी पच जाता हे और हमे फिर दुबारा जल्दी भूख लगने लगती हे और इस तरह जाने अनजाने हम ज्यादा केलोरी ले लेते हे। जूस बनाते वक्त पल्प के रूप में फाइबर और जरूरी पोषक तत्व निकल जाते हे तो  उसमे शुगर का अनुपात बढ़ जाता हे। हालाँकि फलो से मिलने वाली शुगर बाकि वैकल्पिक शुगर से अच्छी होती हे मगर आनुपातिक रूप से शुगर ज्यादा होने की वजह से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता हे जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा नही हे।
   ऐसे फल और सब्जियों को जूस के रूप में लेना, जिनको ठोस रूप में खाने में मुश्किल होती हे, अच्छा विकल्प हे मगर हर वक़्त जूस की आदत के बजाये फल और सब्जियों को ठोस रूप में लेना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद हे।

Sunday, 19 March 2017

हर्बल ओषधियो के प्रयोग में सावधानी

कहते हे इस दुनिया में कुदरत के द्वारा संजोया गया ज़र्रा ज़र्रा कुछ ना कुछ काम का हे। जरूरत इस बात की हे की कुदरत की इस कुशल कारीगरी को समझ कर सही उपयोग किया जाये। नेचुरोपैथी इंसानी जीवन के लिए वरदान हे और इसका क्षेत्र बहुत व्यापक हे। एलोपैथिक दवाओ के दुष्प्रभाव से परेशान लोग अब नेचुरोपैथी की शरण में जा रहे हे। और निरंतर हो रहे अनुसंधान से नेचुरोपैथी की प्रमाणिकता भी साबित हो गयी हे की कुदरती चीजे और आहार विहार बड़े से बड़े रोगों में आशातीत लाभ पहुचाते हे मगर ये अच्छी तरह जान लेना भी महत्त्वपूर्ण हे की कुदरती जड़ी बूटिया, हर्ब्स, आहार विहार या जो भी विधि इस्तेमाल की जा रही हे वह किस रोग में कितनी और किस तरह प्रभावी हे।
   कोई भी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी, हर्ब्स के प्रयोग में निम्न सावधानी बरतनी चाहिए-

* जहा तक हो सके हर्बल ओषधीयो के प्रयोग के पहले किसी कुशल चिकित्सक या एक्सपर्ट की सलाह अवश्य ले।

* किसी भी बीमारी का इलाज उस रोग के लक्षणों पर निर्भर करता हे इसलिए हर्बल ओषधीयो का उपयोग करने के पहले रोग के लक्षण अच्छी तरह समझ ले।

* एक सामान्य नियम ये हे की ( स्व उपचार करते समय)  जितनी गंभीर समस्या हो उतने ही अधिक सावधान रहे।

* हर्बल ओषधीयो की खुराक आवश्यकता से अधिक ना ले। लक्षणों के आधार पर ओषधीयो की न्यूनतम खुराक ले।

* ये जरूरी नही की हर्बल ओषधीया हे तो सभी को सूट करेगी। अत: किसी भी प्रकार की एलर्जी और साइड इफ़ेक्ट मालूम हो तो ओषधीयो का प्रयोग तुरंत बंद कर दे।

* गर्भवती महिलाओ, छोटे बच्चो और दूध पिलाने वाली माँ को ओषधीयो के सेवन से पहले जरुर चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।

     नेचुरोपैथी विभिन्न रोगों में रामबाण सिद्ध होती हे बशर्ते हर्बल ओषधीयो का प्रयोग पूर्ण जानकारी के साथ सावधानीपूर्वक किया जाये।

Friday, 17 March 2017

गेंहू के जवारे का रस wheatgrass के आश्चर्य जनक फायदे हिंदी में

गेंहू के बीज को जब बोया जाता हे तो कुछ दिनों में अंकुरित होकर बढने लगता हे। और उसमे पत्तिया निकलने लगती हे। ये पत्तियों वाला भाग गेहू का जवारा या wheatgrass कहलाता हे। गेहू का जवारा और उसका निकाला गया रस अत्यंत पोषक होता हे।  इसे ग्रीन ब्लड (हरा रक्त) भी कहते हे। ये एक सम्पूर्ण आहार हे और विभिन्न रोगों से लड़ने में बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ हे। इसमें भरपूर क्लोरोफिल,  एंजाइम्स, लोह तत्व, बीटा केरोटीन, फोलिक एसिड, विटामिन बी काम्प्लेक्स,  विटामिन के और मैग्नीशियम होता हे। इसमें विटामिन बी 17 ( लेट्रियल) भी पाया जाता हे जो बलवान केंसर रोधी हे।
     एंटी ऑक्सीडेंट ,  फ्री रेडिकल्स से बचाकर आयुवृद्दि की गति को धीमा करते हे। और विभिन्न तरह के रोगों से बचाते हे। एंटी ऑक्सीडेंट आयुवर्धक और आरोग्यवर्धक होते हे। ये डीएनए की संरचना में विकृति नही होने देते। रक्तवाहिकाओ और त्वचा को स्वस्थ रखते हे। गेहू के जवारे wheatgrass में कई शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट होते हे।
    गेहू के जवारे का एक महत्त्वपूर्ण तत्व हे क्लोरोफिल। क्लोरोफिल निम्न प्रकार से लाभदायक हे....

* ये घावो के लिए कीटाणुनाशक हे, फंगस रोधी हे और शरीर से टॉक्सिंस का विसर्जन करता हे। रोग पैदा करनेवाले जीवाणुओ को नष्ट करता हे। यकृत का शोधन करता हे।

*  आर्थराइटिस, आमाशय शोथ, गले की खराश में अत्यंत लाभकारी हे।

*यह रक्त बनाता हे।

गेहू के जवारे wheatgrass के रस के कुछ ओषधीय उपयोग निम्न प्रकार हे-

1. गेहू के जवारे का रस केंसर कोशिकाओ को नष्ट करता हे। सर्वप्रथम तो इसमें भरपूर क्लोरोफिल होता हे जो शरीर को ऑक्सीजन से सराबोर कर देता हे। अधिक मात्रा में ओक्सिजन की उपस्थिति से केंसर कोशिकाए नष्ट होने लगती हे। दूसरा गेहू के जवारे में विटामिन बी 17 ( लेट्रियल) और सेलेनियम दोनों होते हे जो केंसर रोधी हे। ये प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता हे और ये रस हल्का क्षारीय होता हे जबकि केंसर अम्लीय माध्यम में ही फलता फूलता हे।

2. ये शरीर से हानिकारक पदार्थ ( टोक्सीन्स) का विसर्जन करता हे।

3. इसके सेवन से जोड़ो के दर्द, त्वचा सम्बन्धी बीमारियों में लाभ होता हे। यदि कुछ महीने इसका सेवन किया जाये तो मुहांसे और उनके दाग धब्बे, झाइयं सब साफ हो जाते हे। एग्जीमा और सोरायसिस में भी लाभ होता हे।

4. गेहू के जवारे wheatgrass का रस माइग्रेन से मुक्ति में भी लाभदायक हे।

5. इसके सेवन से कब्ज़, गैसीय विकार दूर होते हे। पेट के कृमि को शरीर से बहार निकालने के लिए और मासिक धर्म की अनियमितताए दूर करने के लिए भी उपयोगी हे।

6. नेत्र विकार दूर करके नेत्र ज्योति बढ़ाता हे और रक्तचाप और हृदय रोग में लाभकारी हे।

7.गेहू के जवारे के रस के नियमित सेवन के साथ कच्चे अपक्व भोजन के सेवन से मोटापे में अतिशीघ्र लाभ होता हे।

8.आंतो और आमाशय के अल्सर में पत्तागोभी का रस और गेहू के जवारे का रस चमत्कारिक परिणाम देता हे।

9.शरीर की सुरक्षा प्रणाली मजबूत करता हे।

10. दांतों को सड़ने से बचाता हे और मुह की दुर्गन्ध दूर करता हे।

11. इससे बाल असमय सफ़ेद नही होते और शरीर उर्जावान, स्वस्थ बना रहता हे।

गेहू के जवारे wheatgrass को उगाने की विधि-

* अच्छी किस्म के जैविक गेहू के बीज ले।

* अच्छी उपजाऊ मिटटी में जैविक गोबर की खाद मिला ले।

* सात गमले ले जिनमे नीचे छेद हो। गमले के छेद को पत्थर के टुकड़े से ढककर , खाद मिली हुई मिटटी को आधा भर ले। और पानी छिडक दे।

* एक रात पहले जग में 100 ग्राम गेहू भिगो कर रखे।

* सातों गमले में एक एक करके रविवार, सोमवार  इस प्रकार सातों दिन के नाम लिख दे।

*मान लो आज रविवार हे तो एक रात पहले भीगे गेहू को धोकर  मिटटी से आधा भरे गमले में एक परत के रूप में बिछा दे। फिर उसके ऊपर थोड़ी मिटटी डाल दे और पानी से सींच दे। गमले ऐसी जगह रखे जहा थोड़ी धुप और हवा हो मगर सीधी धुप गमलो पर ना पड़े। अगले दिन सोमवार वाले गमले में फिर हर रोज एक गमले में गेहू बोते रहे।

* दो बार पानी दे ताकि मिटटी नम बनी रहे। जवारे एक इंच बढने पर एक बार पानी देना ही पर्याप्त हे।

* सात दिन बाद 5 या 6 पत्तियों वाला 6 से 8 इंच लम्बा जवारा निकल आएगा। इसे जड़ सहित उखाड ले और इस गमले में फिर से गेहू बो दे।

*धुले हुए जवारे की जड़ काटकर हटा दे और फिर इसे मिक्सी में थोडा पानी डालकर पीस ले और छानकर उपयोग करे।

सेवन का तरीका-

सामान्यतया 60 से 120 मिली. प्रतिदिन या एक दिन छोडकर खाली पेट सेवन करना चाहिए या फिर 30 से 60 मिली. दिन में दो या तीन बार भी ले सकते हे। सप्ताह में पांच दिन सेवन करना सही होता हे। इसमें नमक, चीनी या कोई अन्य मसाला नही मिलाना चाहिए।

ध्यान दे-  सभी जानकारी शिक्षा प्रद हे। किसी भी ओषधीय उपयोग से पहले चिकित्सक या एक्सपर्ट की सलाह जरुर ले।

Thursday, 9 March 2017

शहद Honey से पाए चेहरे का निखार

शहद एक ऐसी प्राकृतिक चीज हे, जो मनुष्य स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नही। इसके चिकित्सीय गुणों की जानकारी काफी वक़्त पहले से लोगो को हे और प्राचीन वक़्त से ही इसके इस्तेमाल के प्रमाण मौजूद हे। मिस्र की सभ्यता जो की विश्व की प्राचीन सभ्यताओ में से एक हे, में भी शहद के इस्तेमाल के प्रमाण पिरामिडो की खुदाई में मिलने वाले अवशेषों में मिले हे। शहद में एंटी बेक्टिरियल और एंटी फंगल गुण होते हे और इसकी nutrition value भी अच्छी हे। इसे प्राकृतिक चिकित्सा में तो इस्तेमाल किया ही जाता हे मगर हम बात करेंगे की त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए शहद का इस्तेमाल कैसे करे।
  शहद सभी प्रकार की त्वचा के लिए उपयोगी हे। ये एक बेहतरीन प्राकृतिक moisturiser भी हे जो त्वचा पर जादू का असर करता हे। स्किन को नमी और पोषण देता हे। शहद से बने कुछ फेस पैक इस प्रकार हे।

* एक अंडे की सफेदी में एक छोटा चम्मच शहद मिलाये। इसे चहरे पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दे। फिर साफ़ पानी से चेहरा धो ले। शहद त्वचा को नमी और पोषण देता हे और अंडे का सफेद हिस्सा चेहरे की चिकनाई कम कर त्वचा में कसाव लाता हे।

* एक चम्मच शहद में एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर चहरे पर लगाये और 20 मिनट बाद धो ले। इसके नियमित इस्तेमाल से स्किन में निखार आता हे और रंग साफ़ होता हे।

* आधा पका केला मेश कर ले फिर इसमें एक चम्मच शहद मिलाये। इस लेप को चहरे पर आधा घंटा रखे। कांतिमय चहरे के लिए अच्छा उपाय हे।

* शहद और नारियल तेल को समान मात्रा में मिलाकर  चहरे पर लगाये। इसके नियमित इस्तेमाल से दाग धब्बे हल्के होते हे।

* शहद में थोड़ी सी पिसी हल्दी मिलाकर लगाने से एक्ने, मुहाँसो में फायदा होता हे।

* एक चम्मच शहद में एक चम्मच पिसा बादाम और आधा चम्मच नींबू मिलाकर पेस्ट जैसा बनाये और चहरे पर स्क्रब की तरह इस्तेमाल करे। कुछ देर बाद हल्के गर्म पानी से धो ले। इससे स्किन की डेड सेल्स निकल जाती हे और चहरे पर चमक आती हे।

* दूध और शहद मिलाकर लगाने से त्वचा को पोषण मिलता हे और स्किन स्वस्थ और मुलायम बनी रहती हे।

Monday, 6 March 2017

सौफ़ fennel seeds के स्वास्थ्य वर्धक फायदे

सौफ़ जिसे अंग्रेजी में fennel seeds कहते हे रसोई में इस्तेमाल होनेवाली  ऐसी चीज हे जिसे कई रूपों में इस्तेमाल किया जाता हे। कश्मीरी और गुजरती cuisine में सौफ एक मुख्य मसाला हे। ये एक सुगन्धित मसाला हे जिसे स्वाद बढ़ाने के लिए सब्जियों, आचार, सूप, सलाद आदि में बहुतायत से इस्तेमाल किया जाता हे। सौफ या fennel seeds अच्छा स्रोत हे प्रोटीन, फाइबर , बी विटामिन्स, मिनरल्स स्पेशली कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और मैगनीज का। इसमें औषधीये गुण भी होते हे। आइये जानते हे इसके औषधीये गुणों के बारे में-

*अपच दूर करने के लिए सौफ को पानी में उबालकर छानकर मिस्री मिलाकर पिए।

*सामान मात्रा में सौफ , मिस्री और बादामगिरी को पीसकर मिलाकर रोजाना गर्म दूध के साथ तीन चम्मच फंकी लेने से स्मरण शक्ति बढती हे और सिरदर्द में भी लाभ होता हे।

*खाने के बाद सौफ खाने से खाना अच्छी तरह पचता हे।

* रोजाना सुबह शाम खाली सौफ खाना त्वचा के लिए फायदेमंद हे।

*सौफ को पीसकर सिर पर लेप करने से, सिरदर्द, गर्मी व चक्कर आना शांत होता हे।

*सौफ , धनिया और मिस्री मिलाकर  दिन में दो तीन बार पानी के साथ लेने से माइग्रेन दूर होता हे।

*छोटे बच्चो को सौफ उबालकर ठंडा करके उसका पानी पिलाने से उनका पेट ठीक रहता हे।

Saturday, 4 March 2017

स्पिरुलिना spirulina सुपर फ़ूड और भविष्य का श्रेष्ठ आहार

स्पिरुलिना जिसे  सुपर फ़ूड भी कहा जाता हे, एक हरे नीले रंग का शैवाल हे। ये एक कम्प्लीट फ़ूड सप्लीमेंट हे। जो टेबलेट, कैप्सूल और पाउडर के रूप में बाज़ार में उपलब्ध हे। स्पिरुलिना प्रोटीन का ऐसा प्राकृतिक स्रोत हे जो मनुष्य को  ज्ञात प्रोटीन की सबसे ज्यादा मात्रा उपलब्ध करवाता हे। इसमें तकरीबन 60 फीसदी प्रोटीन होता हे जो सोयाबीन से 3 गुना और मांस से 5 गुना ज्यादा हे। उल्लेखनीय हे की संयुक्त राष्ट्र ने 1974 में स्पिरुलिना को दुनिया के लिए " भविष्य का सर्वश्रेष्ठ आहार " घोषित कर दिया था। यूनिसेफ के अनुसार हमारे देश भारत में 4 वर्ष से कम उम्र के 60 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हे। और दुनिया में कुपोषण के मामले में 3 में से 1 बच्चा भारत का हे। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे में कुपोषण के खिलाफ जंग में स्पिरुलिना एक मुख्य हथियार हे। इसमें प्रोटीन के अलावा जरूरी एमिनो एसिड्स और दुसरे जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हे  जैसे आयरन, मिनरल्स, बी विटामिन्स, जरूरी फैटी एसिड्स। इसमें बीटा केरोटिन की उच्च मात्रा होती हे और ऐसा वनस्पतिक स्रोत हे जिसमे यकृत के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा विटामिन बी 12 पाया जाता हे

* स्पिरुलिना शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को शक्ति देता हे।

* विश्व स्वास्थ्य संघटन ने पाया की रतोंधी के मुकाबले के लिए स्पिरुलिना अच्छा खाद्य पदार्थ हे। इसमें पाया जाने वाला बीटा केरोटिन आँखों के लिए फायदेमंद हे।

* इसमें मिलनेवाला प्रोटीन और एमिनो एसिड्स मांसपेशियो के निर्माण में सहायक हे। इसलिए बढ़ते बच्चो के विकास के लिए अच्छा हे।

* ये बी विटामिन्स का अच्छा स्रोत हे। कार्डियो वेस्कुलर मसल्स को मेन्टेन करता हे।

*शरीर में आयरन की कमी पूरी करके, एनीमिया को दूर करने में मदद करता हे।

* एंटी ओक्सिडेंट कैंसर से सुरक्षा प्रदान करते हे।

साइड इफेक्ट्स-   सामान्यतया स्पिरुलिना के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नही हे मगर जिन लोगो को " हाइपर पैरा थाइरोडिज्म" हे या सी फ़ूड से एलर्जी हे या यदि तेज बुखार हे तो इसके सेवन से बचना चाहिए।

ध्यान दे-   ये सभी जानकारी शिक्षाप्रद हे। इसका किसी चिकित्सीय परामर्श से सम्बन्ध नही हे। वैसे तो स्पिरुलिना एक सुरक्षित हर्ब हे मगर बिना डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के इसका सेवन ना करे। ओवर डोज की वजह से शरीर में हाई प्रोटीन के कारण यूरिक एसिड बढ़ सकता हे और लीवर को नुकसान पहुच सकता हे।
और इसका सेवन करने पर सामान्य से थोडा ज्यादा पानी पीना चाहिए।