Tuesday, 28 February 2017

खट्टे मीठे गोलगप्पे या पानीपूरी कैसे बनाये।

गोलगप्पे जिसे पानीपूरी, पताशी या पुचका भी कहते हे, भारत का एक आम स्ट्रीट स्नैक हे। मसालेदार खट्टा मीठा पानी और प्याज, आलू, इमली चटनी, चाट मसाले और उबले चने की स्टफिंग से भरी आटे या सूजी की पुरियो से बना एक चटकारेदार स्नैक हे। वैसे तो इसे सभी पसंद करते हे मगर महिलाओ और लडकियों को ये चाट कुछ ज्यादा ही लुभाती हे। वैसे तोबड़े बड़े शोपिंग माल्स हो या खरीददारी के लिए छोटी छोटी दुकाने, पानीपूरी की उपलब्धता हर जगह हे मगर दुकानों के बाहर लगनेवाले चाट के ठेलो पर मिलने वाली पानीपूरी का अपना ही अलग स्वाद हे जिसे हम टेस्ट ऑफ़ स्ट्रीट इंडिया भी कह सकते हे।आइये जानते हे इसे बनाने की विधि-

सामग्री-

* 2 कप सूजी या रवा

* 2 टेबल स्पून मैदा

*1/4 टी स्पून बेकिंग सोडा

*2 टी स्पून तेल (मोयन के लिए)

*1/2 टी स्पून नमक

* 8 टेबल स्पून पानी  या आवश्यकतानुसार

* तलने के लिए तेल

विधि-  सूजी, नमक, मैदा, बेकिंग सोडा और 2 टी स्पून तेल को अच्छे से मिला ले। फिर 4 टेबल स्पून पानी डालकर हाथो से गूंधे। जब पानी पूरा समा जाये तो थोडा पानी और डालकर अच्छी तरह आटे को गूंधे। अच्छी पानीपूरी के लिए आटे को अच्छी तरह गूंधना जरूरी हे। जरूरत हो तो और पानी मिलाकर आटे को गूंधे। आटा ना बहुत ज्यादा सख्त हो ना बहुत ज्यादा नर्म। फिर उसे गीले किचन टॉवल से ढककर आधा घंटा रेस्ट के लिए रख दे। आधा घंटे बाद आटे को फिर से अच्छी तरह गूंध कर उसे रोटी की तरह बड़ा बड़ा बेले। फिर कुकी कटर या छोटी कटोरी की मदद से छोटी छोटी पूरिया बना ले। ध्यान रहे पूरिया बहुत ज्यादा पतली भी ना हो और बहुत ज्यादा मोटी भी नही, वरना वह फूलेगी नही। फिर उन्हें गर्म तेल में हल्का सुनहरी फ्राई करे और उबले आलू, प्याज, चाट मसाला और उबले चने की स्टफिंग करके मसालेदार पानी जिसमे इमली की चटनी, चाट मसला मिला हो, के साथ परोसे और मज़ा ले भारत के इस पापुलर स्ट्रीट स्नैक का।

Monday, 27 February 2017

गुणकारी अंजीर (अंजीर के स्वास्थ्य लाभ)

अंजीर जिसे अंग्रेजी में फ़िग कहते हे, सेहत के लिए गुणों का खजाना हे। अंजीर अतिरिक्त मीठा फल हे और काफी प्राचीन समय से ही लोगो को इसके गुण और उपयोगिता की जानकारी के सबूत मिले हे। अंजीर चाहे ताज़ा फल के रूप में हो या फिर सुखाई हुई, दोनों ही तरह से फायदेमंद हे। अपने भोजन में रोज़ाना कुछ अंजीर शामिल करने से हम बहुत से स्वास्थ्य लाभ पा सकते हे।  अंजीर में काफी पोषक तत्व पाए जाते हे, और इसे मधुमेह, सर्दी जुकाम, अपच, दमा में लाभकारी पाया गया हे। इसमें अच्छी मात्रा में पोटेशियम होता हे जो उच्च रक्तचाप और शर्करा को नियंत्रित करता हे।
   इसमें पाया जाने वाला फाइबर, विटामिन ए और बी कब्ज़ दूर करने में सहायक हे। इसके एंटी ओक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स से बचाव करके कैंसर का खतरा कम करते हे। इसमें मिलने वाला जिंक, मैग्नीज व मैग्नीशियम प्रजनन स्वास्थ्य को अच्छा रखते हे और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता हे। सूखे अंजीर में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 भी पाए जाते हे। ये फैटी एसिड कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ के खतरे को कम करते हे।

अंजीर बवासीर को खत्म करती हे और जोड़ो के दर्द में फायदेमंद हे।

रोज रात को 3 या 4 सूखे अंजीर कुछ दिन दूध में उबालकर खाने और ऊपर से गर्म दूध पीने से कब्ज़ दूर होती हे।

कमर के दर्द में रोज़ाना 6 अंजीर खाना फायदेमंद हे।

अंजीर पुरानी बलगमी खांसी के लिए भी फायदेमंद हे।

Saturday, 25 February 2017

सेहत के लिए लाभकारी सूखे मेवे

सूखे मेवो में भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हे, जो सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी हे। शोध के मुताबिक रोज़ाना एक मुट्ठी सूखे मेवे खाने से दिल की बीमारियों, कैंसर, मोटापा, मधुमेह, कब्ज़, एनीमिया आदि कई बीमारियों का प्रतिशत कम किया जा सकता हे। प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, विटामिन बी, मैग्नीशियम और एंटी ओक्सिडेंट से भरपूर सूखे मेवे बालो और त्वचा को भी स्वस्थ रखते हे।




स्वाद राजस्थान का

किसी भी क्षेत्र की खाद्य संस्कृति पर उस क्षेत्र की भोगोलिक परिस्थितियों का व्यापक प्रभाव पड़ता हे। हमारा देश भारत भोगोलिक परिस्थितियों के मामले में अपनेआप में विभिन्नताए समेटे हुए हे। यहा एक जगह समन्दर हे तो दूसरी जगह रेगिस्तान। कही कलकल करती नदिया, कही पथरीले पठार, कही बर्फीली वादिया तो कही हरे भरे हरियाले मैदान। इसलिए यहा हर क्षेत्र का अपना अलग फ़ूड कल्चर हे। आज बात करते हे राजस्थान की।
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   राजस्थानी फ़ूड कल्चर काफी समृद्ध हे। यहा के खाने में दूध, दही, घी, दाले और अनाज की प्रमुखता हे। पानी की कमी और रेतीली भूमि की वजह से हरी सब्जियों की कमी हे। चने की दाल से बनने वाला "बेसन" भी एक प्रमुख सामग्री हे। जिससे कई तरह के व्यंजन बनाये जाते हे। जैसे बेसन के गट्टे, कढ़ी - पकोड़े, नमकीन वगैरह। यहा का खाना बाकि दुसरे क्षेत्रो के मुकाबले तीखा और मसालेदार होता हे। मिठाइयाँ भी काफी पसंद की जाती हे और अक्सर खाने के साथ या पहले( मेन कोर्स) में परोसी जाती हे। दाल बाटी चूरमा तो राजस्थानकी पापुलर डिश हे ही इसके अलावा जोधपुर की मिठाइयाँ और मावे की कचोरिया, बीकानेर की भुजिया और रसगुल्ले, पुष्कर के मालपुए और जयपुर के घेवर भी काफी पसंद किये जाते हे।

सेहत बिगाड़ते जंक फ़ूड

बच्चो और किशोरों में बढती जंक फ़ूड की दीवानगी अच्छे स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हे। इस उम्र में विकसित हुई खाने से सम्बन्धित आदते, जीवन पर्यन्त पसंद का पर्याय बनी रहती हे। जंक फ़ूड में पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी होती हे और वसा और शक्कर का अनुपात भी ज्यादा होता हे जो मोटापा, मधुमेह, मानसिक और शारीरिक स्फूर्ति की कमी आदि कई बीमारियों की वजह बनता हे। दूसरा इन खाद्य पदार्थो की प्रोसेसिंग तकनीक से भी इनमे कुछ रासायनिक परिवर्तन हो सकते हे जो की स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हे। शीतल पेय(कोल्ड ड्रिंक्स) में फास्फोरिक एसिड होता हे जो कैल्शियम को नष्ट कर हड्डियों को नुकसान पहुचा सकता हे। अत्यधिक जंक फ़ूड के सेवन से स्वास्थ्य तो बिगड़ता ही हे, मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता हे। मानसिक चेतना और एकाग्रता घटती हे। दूसरा जंक फ़ूड के सेवन की वजह से हेल्दी फ़ूड नही ले पाते। आज बच्चो में दूध या जूस के बदले शीतल पेय और ताज़ा फल सब्जियों का विकल्प प्रोसेस्ड फ़ूड लेते जा रहे हे जो वाकई चिंता की बात हे।