Wednesday, 29 November 2017

अंडा करी या एग करी बनाने का आसान और फ़ास्ट तरीका

अंडा करी या एग करी जिसे एग कोरमा भी कहते है बहुत टेस्टी और कंफर्ट फ़ूड है।इंडिया में काफी पॉपुलर भी है। एग करी अलग अलग जगहों पर अलग अलग तरीको से बनाई जाती है और नॉन, रोटी , और परांठा आदि के साथ सर्व की जाती है। आज हम शेयर कर रहे है एग करी या एग कोरमा बनाने का आसान और फ़ास्ट तरीका
सामग्री - 
4 उबले अंडे
2 प्याज की पेस्ट
2 टमाटर की प्यूरी
2 चाय का चम्मच अदरक लहसुन पेस्ट
1/2 कप दही
थोड़ा धनिया, हल्दी पाउडर, गर्म मसाला पाउडर
लाल मिर्च, नमक स्वादानुसार
1 छोटा चम्मच साबुत गर्म मसाला
1/2 छोटा चम्मच कसूरी मेथी
1/2 छोटा चम्मच मैथी दाना
3 बड़े चम्मच तेल
विधि -  सबसे पहले एक फ्राई पेन में 1 बड़ा चम्मच तेल गर्म करके अंडो को हल्का फ्राई कर ले।अब एक दूसरे बर्तन में 2 बड़े चम्मच तेल गर्म करें। उसमे साबुत गर्म मसाला और मेथी दाना डालकर फिर प्याज की पेस्ट डाले।5 मिनट भूनकर अदरक लहसुन पेस्ट और सभी सूखे मसाले डाले।फिर टमाटर की प्यूरी और दही डालकर अच्छी तरह भुने।कसूरी मेथी डाले और फिर फ्राई किये हुए अंडे डालकर 5 मिनट पकाये।अब एक कप पानी डालकर मीडियम आंच पर 5 मिनट और पकाये और हरा धनिया व पिसा गर्म मसाला से गार्निश करके गर्मा गर्म रोटी या नॉन के साथ परोसें।

Wednesday, 22 November 2017

पालक के औषधीय गुण, सब्जी ही नही दवा भी है पालक

पालक जिसे हम सब्जी की तरह इस्तेमाल करते है इसमें औषधीय गुण भी होते है।इसमें आयरन,कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, खनिज लवण, प्रोटीन, विटामिन ए व सी आदि तत्व पाए जाते है।

लौह तत्व की कमी की वजह से रक्ताल्पता या एनीमिया में पालक का सेवन अत्यंत लाभकारी है।

ऐसे रतौन्धी रोगी जिन्हें हल्के प्रकाश में स्पष्ट दिखाई नही देता उन्हें गाजर व टमाटर के रस में बराबर मात्रा में पालक का जूस देने से लाभ होता है।

पालक के रस में सेंधा नमक मिलाकर पीने से दमा और श्वास रोगों में लाभ होता है।

ब्लड प्रेशर के रोगियों को पालक का सेवन अधिक करना चाहिये। यह रक्त प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है।

पालक के निरंतर सेवन से रंग में निखार आता है।रक्त शुद्धि और शक्ति का संचार होता है।

शारीरिक दुर्बलता के लिए पालक और टमाटर का रस मिलाकर सेवन करना लाभप्रद होता है।

कैल्शियम से भरपूर पालक हड्डियों के लिए भी गुणकारी है।

गर्भावस्था में फोलिक एसिड की पूर्ति के लिए पालक का सेवन लाभप्रद है।

ककड़ी, गाजर और पालक का रस समान मात्रा में बनाकर पीने से बालों को लाभ होता है।बाल लंबे और घने होते है।

Thursday, 8 June 2017

भोजन जो रखे श्वसन तंत्र दुरुस्त food for lungs health

फेफड़ो के स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण व धुम्रपान के नुकसान को कम करने और lungs cleansing के लिए कुछ तरह के फ़ूड में मेडिकल प्रॉपर्टीज होती हे। ये भोज्य पदार्थ बहुत लाभकारी हे और आसानी से हर घर में उपलब्ध होते हे। जैसे अदरक जोकि प्रभावी हे फेफड़ो से म्यूकस को कम करने में जबकि प्याज और हल्दी श्वसन तंत्र की समस्याओ से निपटने में प्रभावी हे। कुछ आसान रेसिपीज इस प्रकार हे जोकि lungs cleansing या फेफड़ो के ditoxification के लिए बहुत प्रभावी हे।

1 --  सामग्री --  दो बड़े चम्मच पिसी हल्दी
                      एक बड़ा टुकड़ा अदरक
                      400 gm प्याज
                     रॉ शुगर (शक्कर)
                    1 लीटर पानी

विधि ----   पानी को उबाले और उसमे शक्कर मिला ले। फिर उसमे बारीक कटे अदरक और प्याज डाले। गैस कम करके पकाए फिर हल्दी डाल दे। जब पानी 3/4 या तकरीबन आधा रह जाये तो गैस बंद करके उसे ठंडा कर ले। किसी कांच की बोतल या ज़ार में छानकर भर ले और फ्रिज में रखे। सुबह खाली पेट दो चम्मच और शाम को खाने के 2 घंटे बाद दो चम्मच सेवन करे। इसे 3 या 4 दिन फ्रिज में स्टोर करे फिर नया बना ले।

2 ---  सामग्री -- ऑर्गेनिक शहद ( honey)
                     1/2 kg गाजर (carrot)

विधि --   गाजर को पहले सिरका मिले पानी से अच्छी तरह धो ले और छोटा छोटा काट ले। फिर एक बर्तन में पानी के साथ गाजर को उबाल ले। गाजर को इतना उबाले की वह सॉफ्ट हो जाये। इसे ठंडा कर ले। इसका पानी फेंके नही बल्कि इसी पानी में किसी ब्लेंडर या फोर्क की मदद से गाजर को अच्छी तरह मैश कर ले। अब इसमें 4 बड़े चम्मच शहद मिलाये। इसे अच्छी तरह मिक्स करके किसी कांच के ज़ार में भरकर फ्रिज में स्टोर करे। रोजाना खाने के बाद 3 चम्मच इसका सेवन करे। कुछ सप्ताह में ही श्वसन तंत्र के स्वास्थ्य में लाभकारी बदलाव नजर आता हे।

3 --- सामग्री --   पुदीना ( peppermint)
                      शहद  ( honey)

विधि --  पानी गर्म करे और उसमे पुदीना डालकर कुछ देर उबाले। फिर ठंडा करके एक गिलास में छान ले। अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाये। दिन में दो बार इसका सेवन करे।

   इनके साथ ही फेफड़ो (lungs) के लिए लाभकारी कुछ फूड्स इस प्रकार हे।

फूड्स फॉर लंग्स ( food for lungs) -- लहसुन,प्याज,अदरक, हल्दी, पत्तागोभी, ब्रोकोली, फूलगोभी, काली मिर्च, कद्दू, अनार, सेब, अनन्नास, गाजर, नारंगी, केले, अंगूर, सूखे मेवे खासकर अखरोट,आंवले आदि।
इन फूड्स का किसी ना किसी तरह सेवन करते रहना चाहिए। मौसमी फलो का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
   

Wednesday, 31 May 2017

तम्बाकू एक धीमा जहर

हर साल 31 मई को विश्व तम्बाकू दिवस के रूप में मनाया जाता हे। तम्बाकू से होनेवाले नुकसान के प्रति लोगो में जागरूकता के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संघठन द्वारा इसकी शुरुआत की गयी। दुनियाभर में 1.3 अरब लोग किसी ना किसी तरह तम्बाकू का इस्तेमाल करते हे।
अंतर्राष्ट्रीय व्यस्क तम्बाकू सर्वेक्षण के मुताबिक भारत की 34.6  फीसदी व्यस्क आबादी तम्बाकू का सेवन करती हे। इनमे से 47.9 फीसदी आबादी पुरुषो की हे और 20.3 फीसदी आबादी महिलाओ की।
धुँआ रहित तम्बाकू ( खैनी, ज़र्दा, गुटखा) इस्तेमाल करने वालो की संख्या 40% से अधिक हे।
  भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान (ICMR) की रिपोर्ट में कहा गया हे की पुरुषो में 50% और स्त्रियों में 25% केंसर की वजह तम्बाकू हे। धुँआ रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक यौगिक होते हे इनमे से 29 रसायन कैंसर पैदा कर सकते हे।
  तम्बाकू में निकोटिन , केडमियम और मोनोऑक्साइड तत्व सेहत के लिए अत्यंत हानिप्रद हे।
कैंसर के अतिरिक्त तम्बाकू सेवन से हार्ट अटेक, कोरोनरी ह्रदय रोग, छाती में जकड़न,दर्द, स्ट्रोक, एन्जाइना, क्रोनिक ब्रोंकाइटिल, निमोनिया, मसूडो और दांतों की बीमारी ,  उच्च रक्तचाप, अवसाद, जबड़ो में जकड़न, ऊर्जा में कमी , अल्सर, दमा आदि का भी खतरा रहता हे। धूम्रपान के धुएं में 4000 रसायन मौजूद रहते हे।
सर्कार को पान मसाला व सिगरेट आदि की बिक्री से जो राजस्व प्राप्त होता हे उससे कही अधिक राशि उसे तम्बाकू जनित रोगों से निपटने में खर्च करनी पडती हे।
  तम्बाकू के खतरे को नजरंदाज़ करना नुकसानदायक ही नही बल्कि आत्मघाती भी होता हे।
  तम्बाकू के खतरों के बारे में जागरूकता ही इसके नुकसान से बचने का सर्वोत्तम उपाय हे। इसके खतरों का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। स्कूलो के पाठ्यक्रमों में भी इसे शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि ज्यादातर व्यस्क आबादी ही इससे ग्रसित हे।
  तम्बाकू छोड़ने के उपायों के बारे में भी ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जाना आवश्यक हे। जो व्यक्ति तम्बाकू छोड़ने का संकल्प कर चुका हो उसे चाहिए की भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त फलों व सब्जियों को वरीयता दे। फाइबर युक्त रेशेदार आहार का सेवन भी लाभदायक हे ताकि आंतो के सुचारू संचालन के कारण शरीर से हानिकारक पदार्थ मल के जरिये बाहर निकल सके।  तम्बाकू छोड़ते समय निकोटिन की तलब पूरी करने के लिए निकोटिन की चुइंगम या टेबलेट आती हे जिनका प्रयोग डॉक्टर की सलाह से किया जा सकता हे।
  प्रतिदिन योग प्राणायाम करना चाहिए ताकि इच्छा शक्ति मजबूत हो। पेय पदार्थ का सेवन अधिक करें मगर कॉफ़ी, मीठी चीजो और अधिक कैलोरी वाली चीजो का सेवन कम करे।
  तम्बाकू छोड़ने की कोशिश करने पर बचैनी , अनिंद्रा, तनाव, सिरदर्द, हाथ पैर कांपना, भूख ना लगना जैसे लक्षण शुरू हो जाते हे। जिन्हें विड्रावल लक्षण (withdrawal symptoms) कहा जाता हे।
  इन लक्षणों से दृद निश्चय , पूरी कोशिश,  नियमित दिनचर्या, योगाभ्यास  और पोषक स्वास्थ्यकर भोजन के द्वारा निपटा जा सकता हे। आत्म विश्वास बनाये रखना जरुरी हे।
  दिन में दो चार बार सौफ, इलायची, सूखे आवले आदि चबाते रहे।
   अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके नींबू के रस में भिगोकर, थोडा काला नमक डालकर धूप में सुखा ले। बीच बीच में ये चबाते रहे। इससे तलब कम होती हे और भूख बढती हे।
    याद रखे तम्बाकू जहर हे और आपके साथ घटित होनेवाली हर घटना का असर आपके अपनों, आपके परिवार पर भी पड़ता हे। अत: इस धीमे जहर से खुद को बचाकर रखे।

Tuesday, 30 May 2017

विटामिन डी की कमी से होने वाले नुकसान vitamin d deficiency (hindi)

विटामिन डी एक जरुरी पोषक तत्व हे जो शरीर में केल्शियम के अवशोषण और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी हे। ये सूरज की रौशनी के सम्पर्क में आने पर त्वचा में खुद ब खुद बनने लगता हे। सूरज की रौशनी में 10 मिनट खड़े रहने पर भी पर्याप्त विटामिन डी मिल जाता हे मगर दुर्भाग्य से देश में पर्याप्त सूरज की रोशनी होने पर भी लगभग 65 से 70 फीसदी भारतीयों में विटामिन डी की कमी हे। और अन्य 15 फीसदी में विटामिन डी अपर्याप्त मात्रा में हे।
विटामिन डी की कमी और कम मात्रा में केल्शियम का सेवन आस्टियोपोरोसिस, निम्न बोन मास और मांसपेशियो की कमजोरी के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हे।
 
विटामिन डी की कमी के लक्षण --  जोड़ो या पीठ में दर्द, थकान, डिप्रेशन , मांसपेशियो में दर्द आदि।

विटामिन डी की कमी के कारण --  सूरज की रौशनी कम मिलना, सनस्क्रीन का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल करना, त्वचा का रंग निर्धारित करने वाले पिगमेंट मेलानिन का अधिक होना भी विटामिन डी की कमी का कारण बन सकता हे। मेलानिन सूरज की रौशनी से त्वचा में विटामिन डी बनने की प्रक्रिया को बाधित करता हे।
  बहुत ज्यादा वजन होने के कारण भी विटामिन डी की कमी हो सकती हे क्योकि रक्त में विटामिन डी को फैट कोशिकाए अवशोषित कर लेती हे जिसके कारण समस्या बढ़ सकती हे।
कुछ बीमारियों जैसे कोलिएक डिजीज़, पाचन तंत्र में कोई गड़बड़ी होने से भी कई बार खाने की चीजो में मौजूद विटामिन डी अवशोषित नही हो पाता और इसकी कमी हो जाती हे।

विटामिन डी की कमी से हड्डिया कमजोर और भुरभुरी हो जाती हे साथ ही विटामिन डी ह्रदय , मस्तिष्क और प्रतिरोधी कार्यो के लिए भी सामान रूप से महत्त्वपूर्ण हे। स्वस्थ शरीर बनाये रखने में विटामिन डी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता हे।

विटामिन डी  अंडा,  मशरूम, चीज, मछली,  कॉड लिवर  और फोर्टीफाइड दूध में होता हे।
विटामिन डी की ज्यादा कमी होने पर सिर्फ सूरज की रौशनी और खाने पीने की चीजो से इस कमी को पूरा नही किया जा सकता। इसके लिए सप्लीमेंट लेने होते हे। ज्यादातर सप्लीमेंट्स ऐसे होते हे जिन्हें हफ्ते में एक ही बार लेना होता हे।

Saturday, 27 May 2017

स्ट्रेस या तनाव का शरीर पर प्रभाव

स्ट्रेस एक प्राकृतिक शारीरिक और मानसिक रिएक्शन हे जोकि अच्छे और बुरे दोनों तरह के अनुभव के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता हे। सीमित मात्रा में ये स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए लाभकारी हे। शरीर स्ट्रेस के कारण हार्मोन रिलीज़ करता हे जिसके कारण हार्ट और ब्रीद (श्वसन) रेट बढ़ जाती हे। ब्रेन ज्यादा ओक्सीजन प्राप्त करता हे और दिमाग की सतर्कता बढ़ जाती हे परिणामस्वरुप इंसान किसी भी मुश्किल स्थिति से लड़कर, उस परिस्थिति से बाहर निकलने में सक्षम हो जाता हे।
  सर्वाइव करने के लिए स्ट्रेस जितना जरुरी हे, छोटी छोटी बातो पर बेवजह स्ट्रेस लेना या लगातार और क्रोनिक स्ट्रेस स्वास्थ्य और सेहत के लिए उतना ही नुकसानदायक हे।
स्ट्रेस के शरीर पर होने वाले प्रभाव इस प्रकार हे -----

1 --  हेडेक या सिरदर्द क्रोनिक स्ट्रेस का एक कॉमन साइड इफ़ेक्ट हे।

2 -- लगातार स्ट्रेस नींद में बाधक हे और अनिंद्रा (insomia) का कारण हे।

3 -- स्ट्रेस और नींद की कमी डिप्रेशन की वजह बन सकता हे।

4 -- स्ट्रेस या तनाव सांस की गति तेज कर देता हे, जिससे शरीर को ज्यादा ओक्सीजन मिलती हे मगर किसी को श्वसन सम्बन्धी परेशानी ( respiratory problem)  हो तो सांस लेने में तकलीफ हो सकती हे और ये घातक हो सकता हे।

5 -- तनाव हार्ट रेट बढ़ा देता हे और ह्रदय की मांसपेशिया सिकुड़ जाती हे। ऐसी स्थिति में दिल के दौरे की आशंका बढ़ जाती हे।

6 -- तनाव की स्थिति में शरीर में तनाव के हार्मोन कार्टिसोल और एपिनेफ्रीन रिलीज़ होने लगते हे जिसकी वजह से लिवर तेजी से और बहुत अधिक मात्रा में ग्लूकोज बनाता हे ताकि शरीर को उर्जा मिल सके। मगर लगातार तनाव की स्थिति में डाइबिटीज की आशंका पैदा हो जाती हे।

7 -- क्रोनिक स्ट्रेस से गेस्ट्रोइंटेस्टनल प्रॉब्लम, हार्ट बर्न या एसिड रिफ्लक्स, वोमिटिंग, डायरिया, कब्ज़ आदि होने की सम्भावना बढ़ जाती हे।

8 -- स्ट्रेस हार्मोन की वजह से त्वचा की तेल ग्रंथिया अधिक सक्रीय हो जाती हे। फलस्वरूप अस्थायी मुहांसे, एक्ने और अन्य त्वचा संबंधी व्याधिया उत्पन्न हो सकती हे।

9 -- स्ट्रेस हेयर लॉस का भी कारण बन सकता हे। अत्यधिक तनाव की वजह से बाल तेजी से झड़ने लगते हे। विशेषज्ञों के मुताबिक अत्यधिक तनावपूर्ण घटना के तीन महीनो बाद तक बाल झड़ने की समस्या हो सकती हे।

10 --  स्ट्रेस या तनाव की वजह से शोर्ट टर्म मेमोरी लॉस भी हो सकता हे। तनाव से भूलने की बीमारी बढ़ने की आशंका बढ़ जाती हे।

Wednesday, 17 May 2017

अच्छी नींद के लिए असरदार उपाय

अच्छी नींद एक वरदान हे। भरपूर नींद लेना सेहत के लिए बहुत जरुरी हे। आजकल व्यस्त दिनचर्या और देर रात तक जागने के कारण अनिंद्रा ( insomnia) की  समस्या बढती जा रही हे। अनिंद्रा की समस्या दूर करने और अच्छी नींद लेने के कुछ असरदार उपाय इस प्रकार हे। -----

1 -- सोने से दो घंटे पहले कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन से दूरी बना ले ताकि आँखों को आराम मिले और नींद आ सके।

2 -- अच्छी नींद के लिए ये जरुरी हे की सोने का एक समय निश्चित करे और दृढ़ता से रूटीन का पालन करे, इससे नियमित रूप से वक़्त पर नींद आने लगती हे।

3 -- गहरी सांस लेना भी अच्छा उपाय हे। इसके लिए मुह बंद करके नाक से धीरे धीरे और गहरी सांस ले। फिर अपनी सांसो को कुछ सेकंड तक रोके। फिर धीरे धीरे मुंह से सांस छोड़े। दोबारा नाक से गहरी सांस ले। इस चक्र को चार पांच बार दोहराए। इससे नींद अच्छी आती हे।

4 -- हल्दी शरीर में ट्रिप्टोफेन नामक अमीनों अम्ल बनाता हे जो गहरी नींद में सहायक हे। इसलिए सोने से आधा घंटा पहले हल्दी वाला दूध पिए। इससे गहरी और अच्छी नींद आती हे।

5 -- अखरोट के सेवन से नींद अच्छी आती हे क्योकि इसमें मेलाटोनिन हार्मोन होता हे जो नींद के लिए प्रेरित करता हे।

6 -- सोने से आधा घंटा पहले गुनगुने दूध में शहद डालकर पीना अच्छी नींद लाने में सहायक हे।

7 -- गर्म दूध में केसर की कुछ पत्तिया डालकर पीना भी लाभप्रद होता हे।

8 -- सोने से कुछ देर पहले केले का सेवन भी नींद लाने में सहायक हे। केले में काफी मात्रा में पोटेशियम होता हे जो मांसपेशियो की ऐंठन दूर करके मांसपेशियो को सुकून देता हे और अच्छी नींद प्रदान करता हे।

8 -- चेरी में प्राकृतिक रूप से मेलाटोनिन हार्मोन होता हे जो नींद के लिए प्रेरित करता हे अत: सोने से पहले एक कप चेरी का रस पीना भी अच्छा उपाय हे।

9 --  सोने से पहले एक कटोरी भर कर अंगूर का सेवन करना भी सकारात्मक परिणाम देता हे।

10 -- रोज़ाना मुट्ठी भर मूंगफली का सेवन भी अच्छा हे। इसमें नियासिन नामक तत्व होता हे जो शरीर में सेरोटोनिन के स्राव में मदद करता हे। सेरोटोनिन हार्मोन सुकून का अहसास देता हे और नींद में सहायक हे।

11-- सोने के स्थान को आरामदायक और कूल रखना भी जरुरी हे। कमरे का तापमान 20 से 22 डिग्री हो तो नींद अच्छी आती हे।

12 -- अच्छी नींद के लिए ये भी जरुरी हे की रात को चाय या कॉफ़ी का सेवन ना करे क्योकि कैफीन नींद में बाधक हे। कैफीन सुबह के समय लेना बेहतर हे।

Wednesday, 10 May 2017

पर्याप्त पानी पीना शरीर के लिए कितना जरुरी

पानी जिसकी सहज उपलब्धता की वजह से हम अक्सर इसकी अनदेखी कर देते हे। कुछ लोग तो पानी पीते भी तभी हे जब बहुत प्यास लगे। मगर क्या आप जानते हे की पानी हमारे शरीर के लिए कितना और किस तरह जरुरी हे और पर्याप्त पानी पीने के सेहत के लिए क्या क्या फायदे हे।

1-  पानी हमारे बॉडी टेम्प्रेचर को मेन्टेन करता हे, जोकि गर्मी में लू लगने से बचने के लिए बहुत जरूरी हे।

2- हमारे शरीर की रचना (composition) में 60%,
मांसपेशियो की रचना में 75%, हड्डियों की रचना में 22%, और दिमाग की रचना में 75% पानी होता हे।

3-  अत: हमारे जरुरी अंगो को सुरक्षा देने और सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त पानी आवश्यक हे।

4-  हमारा ब्लड (खून) 83% पानी से बना होता हे जोकि पोषक तत्वों और ओक्सीजन को कोशिकाओ तक ले जाने के लिए महत्त्वपूर्ण हे।

5- पानी सामान्य कब्ज और  constipation  को
    दूर करने में मददगार हे।

6- ये हमारे शरीर से हानिकारक पदार्थ( Toxins) और
वेस्ट पदार्थ को बाहर निकालता हे।

7- पर्याप्त पानी पीने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार
   बनी रहती हे।

8-  पानी हमारे एनर्जी लेवल को बढ़ाता हे, स्फूर्ति देता
    हे और मूड ठीक करता हे।

9-  पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता हे।

10-  पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता हे।

11-  मेटाबोलिज्म दर को बढ़ाकर वजन कम करने
      में मदद करता हे।

      सामान्यतया  पूरे दिन में  8 से 10 गिलास या
2 लीटर पानी पीना पर्याप्त होता हे।
   
खाना खाने के फ़ौरन बाद पानी ना पीकर एक या डेढ़ घंटे बाद पानी पीने से खाना पचने में मदद मिलती हे।

सुबह खाली पेट 2 गिलास पानी पीना स्फूर्तिदायक
और कब्जनाशक होता हे।

Thursday, 27 April 2017

मनमर्जी से एंटीबायोटिक्स का सेवन तकलीफ बढ़ा भी सकता हे

आजकल बिना डॉक्टरी परामर्श के एंटीबायोटिक्स लेने का चलन आम हो गया हे। एंटीबायोटिक्स ऐसी दवा हे जो संक्रमण और कई  बीमारियों के इलाज के लिए दी जाती हे। ये बेक्टीरिया के कारण होने वाली बीमारियों का इलाज करती हे तथा अन्य वायरल फ्लू आदि में काम नही करती। कोई भी बेक्टीरियल इन्फेक्शन होने पर हमे डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना चाहिए और सलाहनुसार नियमित पूरा कोर्स करना चाहिए। छोटी मोटी तकलीफों में मनमर्जी से एंटीबायोटिक्स लेना और उसे वक़्त पर पूरा कोर्स नही करने या सही तरीके से पूरी डोज नही लेने के कारण समस्या खत्म होने के बजाये और बढ़ जाती हे। नियमित सलाहनुसार  नही लेने पर सभी बेक्टीरिया नही मरते और कुछ जीवाणु बचे रह जाते हे जो की और अधिक शक्तिशाली हो जाते हे। फिर उनपर साधारण एंटीबायोटिक्स का असर नही होता। इन्हें एंटीबायोटिक्स रेसिस्टेंट बेक्टीरिया कहते हे जो की लम्बी और गम्भीर बीमारी का कारण बन सकते हे। फिर इसके इलाज के लिए ज्यादा हाई पॉवर एंटीबायोटिक्स की जरुरत पडती हे जिसके साइड इफ़ेक्ट भी बहुत हे। जैसे चक्कर आना, उल्टी, एलर्जिक रिएक्शन, साँस लेने में तकलीफ, दिल की धडकन बढना, पेट दर्द आदि।
  लगातार बढती बेक्टीरिया रेसिसटेन्सी, बेअसर होते एंटीबायोटिक्स विश्व भर में चिंता का विषय हे। मरीज को खास अहतियात बरतने की जरूरत हे ताकि इसके गम्भीर परिणामो से बचा जा सके। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन ना करे। नियमित सलाहनुसार कोर्स पूरा करे। दवाइयों की डोज सही मात्रा में और सही समय पर ले।
  इसके अलावा छोटी छोटी तकलीफों में एंटीबायोटिक्स  लेने के बजाये हमे नेचुरल उपायों को अपनाना चाहिए जो प्रभावपूर्ण भी हे और सुरक्षित भी। कुछ प्राकृतिक चीजे जैसे लहसुन, अदरक, हल्दी, प्याज, शहद, एप्पल साइडर विनेगर आदि एंटीबायोटिक्स की तरह कार्य करते हे। दूसरा पोषक भोजन लेना भी जरुरी हे ताकि इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहे और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बनी रहे।

Sunday, 16 April 2017

सुबह का नाश्ता breakfast कितना जरुरी अच्छी सेहत के लिए

दिन की शुरआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा गुजरता हे। पूरी रात आराम करने के बाद जब हम सुबह उठते हे तो हमे भरपूर ऊर्जा की जरूरत होती हे इसलिए सुबह का नाश्ता  पोष्टिक और भरपूर करना चाहिए जिसमे प्रोटीन, कर्बोहाईड्रेड़ और हेल्दी फैट ठीक ठीक मात्रा में हो ताकि हमारा पूरा दिन स्फूर्तिदायक और ऊर्जावान बना रहे।
  एक सर्वे के अनुसार सुबह का नाश्ता ना लेने पर तुनकमिजाजी बढ़ जाती हे। सर्वे में पता चला की जिन्होंने सुबह का  नाश्ता नही किया था उनमे से 53 फीसदी लोगो का मूड पुरे दिन ऑफ रहा और वह पूरा दिन किसी ना किसी के साथ चिक चिक करते रहे। जबकि सुबह भरपूर और अच्छा नाश्ता करने वाले 93 फीसदी लोग दिनभर काफी अच्छे मूड में रहे। इसके अतिरिक्त सुबह का पोष्टिक नाश्ता करने पर रक्त में श्वेत रक्त कणिकाओ में अपेक्षित वृद्दि देखी गयी हे जो  बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती हे।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए भी सुबह का नाश्ता जरुरी हे। और रात को हल्का भोजन करने और सुबह पोष्टिकता से भरपूर नाश्ता करने से रक्त शर्करा और ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती हे।
  आहार विशेषज्ञों के अनुसार लिवर या यकृत सुबह के वक्त अपने ईंधन ग्लाइकोजन से लगभग 75 प्रतिशत वंचित रहता हे। लिवर को ये ईंधन ग्लूकोज से मिलता हे। अपनी क्षतिपूर्ति के लिए लिवर यह ग्लूकोज  मांसपेशियो के प्रोटीन से प्राप्त करना चाहता हे। अत: शरीर में कार्बोहाईड्रेड की कुछ मात्रा पहुचने पर लिवर को ग्लाइकोजन मिल जाता हे और मस्तिष्क को बेहतर कार्य करने के लिए ग्लूकोज की आपूर्ति हो जाती हे।
  सुबह के नाश्ते में क्या खाना चाहिए ये तो अपनी अपनी पसंद पर निर्भर करता हे मगर इतना ध्यान रखना जरुरी हे की नाश्ते में वसा की मात्रा 10 ग्राम से अधिक ना हो और प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेड, वसा और खनिज की संतुलित मात्रा हो।
  नाश्ते में ताजे फल, गेहू की ब्रेड, मलाई रहित दूध, उबले अंडे, अंकुरित अनाज, सोया परांठे, फ्रूट और वेजिटेबल स्मूदीज, आमलेट, ड्राई फ्रूट आदि लिए जा सकते हे या जो भी नाश्ता लिया जाये उसमे वसा, शक्कर और नमक की मात्रा संतुलित होनी चाहिए।


Wednesday, 5 April 2017

दिमागी स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रखने में उपयोगी 10 महत्त्वपूर्ण ब्रेन फ़ूड

दिमागी स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए पोषक भोजन बहुत जरूरी हे। कुछ खाद्य पदार्थो में खास तौर से ऐसे तत्व पाए जाते हे जो दिमाग के लिए अत्यंत लाभकारी हे। इस तरह के खाद्य पदार्थो में 10 फ़ूड ऐसे हे जिन्हें ब्रेन फ़ूड भी कहा जाता हे। ये दिमाग को ताकत देते हे और उसकी कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलने में मदद करते हे। ये 10 ब्रेन फ़ूड इस प्रकार हे।--

1* डार्क चोकलेट ---  डार्क चोकलेट में triptofen,  flevonaid, anti oxident , magnishiam होता हे। triptofen शरीर में फील गुड हार्मोन को रिलीज करने में मदद करता हे जिससे हमे अच्छा महसूस होता हे। फ्लेवोनाइड रक्त संचार बढ़ा कर दिमाग की याद करने की क्षमता और फोकस बढ़ाता हे।
  एंटी ओक्सिडेंट, फ्री रेडिकल्स से बचाकर दिमाग की पॉवर बढ़ाते हे। और मैग्नीशियम स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल को कम करने में मदद करता हे जिससे तनाव कम करने में मदद मिलती हे।

2* बादाम ----  बादाम से प्रोटीन,  विटामिन बी6 और विटामिन ई , जिंक और फेटि एसिड्स मिलते हे। प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओ के पुनर्निर्माण में मदद करता हे। विटामिन्स दिमाग की सम्पूर्ण सेहत को बढ़ाते हे और कोशिकाओ के बूढ़ा होने की गति को धीमा करते हे।
जिंक रक्त प्रवाह में फ्री रेडिकल्स को रोककर  दिमाग की कोशिकाओ को  टूटने से बचाने में मददगार हे।

3* अखरोट ---- अखरोट में पोली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स, विटामिन ई, मिनरल्स और फाइबर होता हे। फैटी एसिड्स दिमाग के लिए बहुत जरुरी होते हे। ये दिमाग की पॉवर और अलर्टनेस बढ़ाते हे।

4* ब्रोकली ----- दिमाग की लर्निंग कैपेसिटी बढ़ाती हे और दिमाग को शांत बनाये रखने में मदद करती हे।

5* पालक -----  पालक में आयरन बहुत होता हे जिससे रक्त प्रवाह बढ़ता हे और दिमाग तेज करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर्स का स्राव होता हे।

6* काले अंगूर ----- काले अंगूर में एंटी ओक्सिडेंट , विटामिन, प्लांट कंपाउंड जैसे फाइटों केमिकल्स पाए जाते हे। ये ब्रेन को डेमेज करने वाले फ्री रेडिकल्स को कंट्रोल करते हे।

7* स्ट्रॉबेरी ------ स्ट्रॉबेरी में  ओक्सिडेटिव स्ट्रेस से दिमाग को सुरक्षित रखने की क्षमता होती हे जिससे अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा कम होता हे।

8* टमाटर ---- टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपिन पॉवर फुल एंटी ओक्सिडेंट और कैंसर रोधी हे। ये फ्री रेडिकल्स का प्रभाव कम करके अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों का खतरा कम करता हे।

9* अनार ----  अनार में भी एंटी ओक्सिडेंट बहुतायत से पाए जाते हे जो फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा देते हे।

10* व्होल ग्रेन ---- साबुत अनाज और उससे बनी चीजे भी दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करते हे।
 

Monday, 3 April 2017

गर्मियों में यू करे त्वचा skin की देखभाल

मौसम बदलने और बढती गर्मी के साथ ही त्वचा की समस्याए भी उपजने लगती हे। जैसे एक्ने, सनबर्न, टैनिंग। इन समस्याओ से बचने के लिए गर्मियों में कुछ सावधानिया और थोड़ी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती हे। प्राकृतिक उपाय भी मददगार साबित होते हे। तो देखते हे की इन गर्मियों में किस तरह स्किन की ख्याल रखे---

*  गर्मियों में ये बहुत जरूरी हे की घर से बाहर निकलने से पहले किसी अच्छे सनस्क्रीन मोइश्चराइजर का प्रयोग करे जो की वाटर बेस्ड हो तो अच्छा हे। ये स्किन में जल्दी अब्सोर्व हो जाता हे। ऑयल और क्रीम बेस्ड मोइश्चराइजर से गर्मियों में बचना चाहिए।

* धुप से बचने के लिए स्कार्फ और सनग्लासेज का प्रयोग करे।

* गर्मियों में स्किन की नियमित क्लींजिंग करते रहना चाहिए। इसके लिए किसी अच्छे क्लीन्ज़र का प्रयोग तो कर ही सकते हे साथ ही प्राकृतिक उपाय भी अपना सकते हे। इसके लिए स्किन को गुलाबजल से साफ़ करे। पपीता भी एक नेचुरल क्लीन्ज़र हे इसे मैश करके कुछ देर चहरे पर लगाये फिर साफ़ पानी से धो ले।

* गुलाबजल में खीरे का रस और नींबू के रस की कुछ बुँदे मिलाकर चहरे पर कुछ देर लगाना भी स्किन के लिए अच्छा हे।

* एलोवेरा सभी तरह की स्किन टाइप के लिए अच्छा होता हे। इसके गूदे को मैश करके 20 मिनट चहरे पर लगाये।

*  मुल्तानी मिट्टी में संतरे के छिलके का पाउडर, शहद, गुलाबजल मिला कर पेस्ट बनाये और चहरे पर लगाये। सूखने पर धो दे। ये पैक तैलीय त्वचा का  अतिरिक्त ऑयल हटाकर स्किन को मोइश्चराइज़ करता हे।

*   केला और शहद मिलाकर लगाने से स्किन में ग्लो आता हे।

*  नींबू और शहद मिलाकर चहरे पर 20 मिनट लगाये। ये गर्मियों के लिए बहुत अच्छा फेस पैक हे।

*  बादाम का पाउडर, कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाये और 30 मिनट चहरे पर लगाये।

      इन सब उपायों के साथ ही स्किन को स्वस्थ रखने के लिए 2 से 3 लीटर पानी पीना, भरपूर नींद लेना और पोषक भोजन लेना भी जरुरी हे।

Wednesday, 29 March 2017

राजस्थान की स्पेशल गट्टा मसाला सब्जी

गट्टे की सब्जी जो की बेसन से बनाई जाती हे और यह पूरे राजस्थान में काफी पसंद की जाती हे। आइये जानते हे गट्टा मसाला सब्जी बनाने की विधि---

सामग्री-- गट्टे के लिए

*  250 gm बेसन

* 3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई

*  1/2  छोटा चम्मच सौफ़

*  1/2 छोटा चम्मच जीरा 

* 1/2  छोटा  चम्मच अजवाइन

* 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला पिसा हुआ
 
*  1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
 
*  1 छोटा चम्मच वेजिटेबल ऑयल (मोयन के लिए)

*  नमक स्वाद के अनुसार
 

ग्रेवी के लिए----

*  1/2 चम्मच जीरा

*  1/2 चम्मच अजवाइन

*  1 मध्यम प्याज़ बारीक कटा हुआ

*  2 टमाटर छोटे आकार में कटे हुए

*  2 छोटे चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट

*  1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

*  1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर

*  नमक स्वाद के अनुसार

*  एक छोटा कप दही

*  एक बड़ा चम्मच वेजिटेबल ऑयल

विधि--- गट्टे बनाने के लिए गट्टे की सारी सामग्री को मिला ले फिर उसमे थोडा थोडा पानी डालकर बेसन के आटे को अच्छी तरह गुंध ले। अब इसके पतले लम्बे आकार के रोल बना ले। एक बर्तन में एक लीटर या अंदाजे से पानी ले और उसे गैस पर उबालने के लिए रख दे। उबाल आते ही इसमें बेसन के रोल एक एक करके डालती जाये। मध्यम आंच पर इसे 10 मिनट पका ले। फिर पानी से निकाल कर अलग बर्तन में 1/2  इंच के टुकडो में काट ले।
   ग्रेवी बनाने के लिए एक कड़ाही में तेल गरम करे। अब उसमे जीरा और अजवाइन डाले, तड़कने पर प्याज डाले और थोडा सॉफ्ट होने तक पकाए। अब लहसुन अदरक का पेस्ट डालकर अच्छी तरह पकाए। फिर उसमे  बारी बारी से टमाटर, लालमिर्च, हल्दी, नमक और दही डालकर इतना पकाए की मसाले से ऑयल अलग होने लगे। अब गट्टे डालकर 2 मिनट पकाए। फिर आधा गिलास पानी डालकर ( उबले गट्टे का पानी भी ले सकते हे) डालकर सिर्फ 2 मिनट पकाए और हरा धनिया से गार्निश करके रोटी या परान्ठे के साथ सर्व करे।