कहते हे इस दुनिया में कुदरत के द्वारा संजोया गया ज़र्रा ज़र्रा कुछ ना कुछ काम का हे। जरूरत इस बात की हे की कुदरत की इस कुशल कारीगरी को समझ कर सही उपयोग किया जाये। नेचुरोपैथी इंसानी जीवन के लिए वरदान हे और इसका क्षेत्र बहुत व्यापक हे। एलोपैथिक दवाओ के दुष्प्रभाव से परेशान लोग अब नेचुरोपैथी की शरण में जा रहे हे। और निरंतर हो रहे अनुसंधान से नेचुरोपैथी की प्रमाणिकता भी साबित हो गयी हे की कुदरती चीजे और आहार विहार बड़े से बड़े रोगों में आशातीत लाभ पहुचाते हे मगर ये अच्छी तरह जान लेना भी महत्त्वपूर्ण हे की कुदरती जड़ी बूटिया, हर्ब्स, आहार विहार या जो भी विधि इस्तेमाल की जा रही हे वह किस रोग में कितनी और किस तरह प्रभावी हे।
कोई भी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी, हर्ब्स के प्रयोग में निम्न सावधानी बरतनी चाहिए-
* जहा तक हो सके हर्बल ओषधीयो के प्रयोग के पहले किसी कुशल चिकित्सक या एक्सपर्ट की सलाह अवश्य ले।
* किसी भी बीमारी का इलाज उस रोग के लक्षणों पर निर्भर करता हे इसलिए हर्बल ओषधीयो का उपयोग करने के पहले रोग के लक्षण अच्छी तरह समझ ले।
* एक सामान्य नियम ये हे की ( स्व उपचार करते समय) जितनी गंभीर समस्या हो उतने ही अधिक सावधान रहे।
* हर्बल ओषधीयो की खुराक आवश्यकता से अधिक ना ले। लक्षणों के आधार पर ओषधीयो की न्यूनतम खुराक ले।
* ये जरूरी नही की हर्बल ओषधीया हे तो सभी को सूट करेगी। अत: किसी भी प्रकार की एलर्जी और साइड इफ़ेक्ट मालूम हो तो ओषधीयो का प्रयोग तुरंत बंद कर दे।
* गर्भवती महिलाओ, छोटे बच्चो और दूध पिलाने वाली माँ को ओषधीयो के सेवन से पहले जरुर चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।
नेचुरोपैथी विभिन्न रोगों में रामबाण सिद्ध होती हे बशर्ते हर्बल ओषधीयो का प्रयोग पूर्ण जानकारी के साथ सावधानीपूर्वक किया जाये।
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