हर साल 31 मई को विश्व तम्बाकू दिवस के रूप में मनाया जाता हे। तम्बाकू से होनेवाले नुकसान के प्रति लोगो में जागरूकता के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संघठन द्वारा इसकी शुरुआत की गयी। दुनियाभर में 1.3 अरब लोग किसी ना किसी तरह तम्बाकू का इस्तेमाल करते हे।
अंतर्राष्ट्रीय व्यस्क तम्बाकू सर्वेक्षण के मुताबिक भारत की 34.6 फीसदी व्यस्क आबादी तम्बाकू का सेवन करती हे। इनमे से 47.9 फीसदी आबादी पुरुषो की हे और 20.3 फीसदी आबादी महिलाओ की।
धुँआ रहित तम्बाकू ( खैनी, ज़र्दा, गुटखा) इस्तेमाल करने वालो की संख्या 40% से अधिक हे।
भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान (ICMR) की रिपोर्ट में कहा गया हे की पुरुषो में 50% और स्त्रियों में 25% केंसर की वजह तम्बाकू हे। धुँआ रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक यौगिक होते हे इनमे से 29 रसायन कैंसर पैदा कर सकते हे।
तम्बाकू में निकोटिन , केडमियम और मोनोऑक्साइड तत्व सेहत के लिए अत्यंत हानिप्रद हे।
कैंसर के अतिरिक्त तम्बाकू सेवन से हार्ट अटेक, कोरोनरी ह्रदय रोग, छाती में जकड़न,दर्द, स्ट्रोक, एन्जाइना, क्रोनिक ब्रोंकाइटिल, निमोनिया, मसूडो और दांतों की बीमारी , उच्च रक्तचाप, अवसाद, जबड़ो में जकड़न, ऊर्जा में कमी , अल्सर, दमा आदि का भी खतरा रहता हे। धूम्रपान के धुएं में 4000 रसायन मौजूद रहते हे।
सर्कार को पान मसाला व सिगरेट आदि की बिक्री से जो राजस्व प्राप्त होता हे उससे कही अधिक राशि उसे तम्बाकू जनित रोगों से निपटने में खर्च करनी पडती हे।
तम्बाकू के खतरे को नजरंदाज़ करना नुकसानदायक ही नही बल्कि आत्मघाती भी होता हे।
तम्बाकू के खतरों के बारे में जागरूकता ही इसके नुकसान से बचने का सर्वोत्तम उपाय हे। इसके खतरों का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। स्कूलो के पाठ्यक्रमों में भी इसे शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि ज्यादातर व्यस्क आबादी ही इससे ग्रसित हे।
तम्बाकू छोड़ने के उपायों के बारे में भी ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जाना आवश्यक हे। जो व्यक्ति तम्बाकू छोड़ने का संकल्प कर चुका हो उसे चाहिए की भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त फलों व सब्जियों को वरीयता दे। फाइबर युक्त रेशेदार आहार का सेवन भी लाभदायक हे ताकि आंतो के सुचारू संचालन के कारण शरीर से हानिकारक पदार्थ मल के जरिये बाहर निकल सके। तम्बाकू छोड़ते समय निकोटिन की तलब पूरी करने के लिए निकोटिन की चुइंगम या टेबलेट आती हे जिनका प्रयोग डॉक्टर की सलाह से किया जा सकता हे।
प्रतिदिन योग प्राणायाम करना चाहिए ताकि इच्छा शक्ति मजबूत हो। पेय पदार्थ का सेवन अधिक करें मगर कॉफ़ी, मीठी चीजो और अधिक कैलोरी वाली चीजो का सेवन कम करे।
तम्बाकू छोड़ने की कोशिश करने पर बचैनी , अनिंद्रा, तनाव, सिरदर्द, हाथ पैर कांपना, भूख ना लगना जैसे लक्षण शुरू हो जाते हे। जिन्हें विड्रावल लक्षण (withdrawal symptoms) कहा जाता हे।
इन लक्षणों से दृद निश्चय , पूरी कोशिश, नियमित दिनचर्या, योगाभ्यास और पोषक स्वास्थ्यकर भोजन के द्वारा निपटा जा सकता हे। आत्म विश्वास बनाये रखना जरुरी हे।
दिन में दो चार बार सौफ, इलायची, सूखे आवले आदि चबाते रहे।
अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके नींबू के रस में भिगोकर, थोडा काला नमक डालकर धूप में सुखा ले। बीच बीच में ये चबाते रहे। इससे तलब कम होती हे और भूख बढती हे।
याद रखे तम्बाकू जहर हे और आपके साथ घटित होनेवाली हर घटना का असर आपके अपनों, आपके परिवार पर भी पड़ता हे। अत: इस धीमे जहर से खुद को बचाकर रखे।
Wednesday, 31 May 2017
तम्बाकू एक धीमा जहर
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Health,
tambaku ke nuksan
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सामयिक और आँखें खोलने वाला लेख है ... सजग रहने की ज़रूरत है तम्बाकू के दुशप्रभाव से ...
ReplyDeleteजी, शुक्रिया दिगम्बर जी।
ReplyDeleteतंबाकू का सेवन खुद की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ है ! ताज्जुब है इतना सब कुछ जानते हुए भी लोग इसका सेवन करते हैं ।
ReplyDeleteतंबाकू का सेवन खुद की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ है ! ताज्जुब है इतना सब कुछ जानते हुए भी लोग इसका सेवन करते हैं ।
ReplyDeleteहमारे समाज मे यही तो विडंबना है कि सभी को पता है कि तम्बाकू सेहत के लिए नुकसानदेह है फिर भी लोग...। शायद इस लेख से कुछ असर हो।
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